जर, जोरू और ज़मीन
स्टेज ओटीटी पर रिलीज़ हुई हरियाणवी वेब सीरीज़ “जर, जोरू और ज़मीन” को अनिल चंडालिया ने लिखा और निर्देशित किया है। लगभग 30 साल पहले इसी नाम से एक फिल्म भी बन चुकी है, इसलिए इस सीरीज़ के नाम के साथ पुरानी यादें और तुलना स्वाभाविक रूप से जुड़ जाती हैं। हालांकि नई सीरीज़ अपनी कहानी और प्रस्तुति के जरिए अलग पहचान बनाने की कोशिश करती है।
कहानी धन, पत्नी और जमीन के इर्द-गिर्द घूमती है और दिखाती है कि कैसे ये तीन चीजें एक खुशहाल परिवार के रिश्तों में दरार पैदा कर सकती हैं। अनिल चंडालिया ने पारिवारिक संघर्ष, लालच और रिश्तों की जटिलता को कहानी का आधार बनाया है। पटकथा काफी मजबूत है और ज्यादातर दृश्यों में कहानी की पकड़ बनी रहती है। सभी किरदारों को जरूरत के मुताबिक समय दिया गया है। हालांकि दो-तीन जगह कुछ दृश्य थोड़े लंबे महसूस होते हैं, जिन्हें थोड़ा छोटा किया जाता तो कहानी की गति और बेहतर हो सकती थी।
सीरीज़ की सबसे बड़ी ताकत इसकी कलाकारों का चयन है। संदीप शर्मा, मनोज राठी, मुकेश मुसाफ़िर, सुमेन सेन, रोहित बच्ची, जेडी बल्लू, अरुण कुमार, आकाश चौवारी और अभिमन्यु यादव ने अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है। संदीप शर्मा की भाव-भंगिमा और अभिनय विशेष रूप से प्रभावशाली है। मनोज राठी ने भी शानदार अभिनय किया है और शादी वाला उनका दृश्य याद रह जाने वाला है। मुकेश मुसाफ़िर का किरदार कहानी में रहस्य बनाए रखता है और अंतिम कड़ी में उनका घटनाक्रम कहानी को एक मजबूत मोड़ देता है। सुमेन सेन भी अपने किरदार में सहज नजर आती हैं। वहीं निकीता शिंगला के अभिनय में कुछ जगह सुधार की गुंजाइश महसूस होती है।
छायांकन की बात करें तो परवीन ने कुल मिलाकर अच्छा काम किया है, हालांकि कुछ बाहरी और खेतों वाले दृश्यों को अधिक बेहतर तरीके से फिल्माया जा सकता था। कुछ मारधाड़ वाले दृश्यों में दृश्य प्रभाव और बारीकियों की कमी महसूस होती है। इसके बावजूद “बन जा मेरी बहू” गीत में खेतों के बीच लिए गए मध्यम और विस्तृत दृश्य काफी खूबसूरत हैं।
संपादन, दृश्य संयोजन और रंग-सुधार में कुछ कमियां नजर आती हैं। कई जगह संपादन को थोड़ा और बेहतर किया जा सकता था और कुछ भावनात्मक तथा रहस्यपूर्ण दृश्यों में रंगों का इस्तेमाल अधिक प्रभावशाली हो सकता था। पार्श्व संगीत कहानी के साथ अच्छी तरह चलता है और दर्शकों को जोड़े रखता है, हालांकि रहस्य वाले दृश्यों में इसे और प्रभावशाली बनाया जा सकता था।
सीरीज़ के गीतों के बोल रोहित बच्ची ने लिखे हैं। खास तौर पर “बन जा मेरी बहू”गीत भावनात्मक रूप से अच्छा प्रभाव छोड़ता है। इंदर सिंह लांबा, अरुण कुमार और अजय सोढ़ा की आवाज़ें गीतों के भाव के साथ अच्छी तरह मेल खाती हैं। शीर्षक गीत में इंदर सिंह लांबा की आवाज़ विशेष प्रभाव पैदा करती है।
वेशभूषा में भी कुछ जगह बेहतर पेशेवर काम की गुंजाइश महसूस होती है, हालांकि हरियाणवी परिवेश को ध्यान में रखने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
कुल मिलाकर, “जर, जोरू और ज़मीन” सीमित बजट और समय में तैयार की गई एक अच्छी हरियाणवी वेब सीरीज़ है।इसकी कहानी, पटकथा और कलाकारों का चयन इसके मजबूत पक्ष हैं, जबकि संपादन, रंग-सुधार और कुछ छायांकन वाले हिस्सों में सुधार की गुंजाइश है। छोटी-मोटी तकनीकी कमियों के बावजूद सीरीज़ अपने कथानक और किरदारों के जरिए दर्शकों को अंत तक जोड़े रखने में सफल रहती है।