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Cinematic Haryana का मिशन, विज़न और टीम।
Cinematic Haryana का सफ़र
Cinematic Haryana : हरियाणवी सिनेमा को तलाशने, समझने और संरक्षित करने की एक पहल Cinematic Haryana की स्थापना पुनीत शर्मा (Punit Sharma) द्वारा हरियाणवी सिनेमा को नए दृष्टिकोण से देखने, उसके इतिहास और वर्तमान को तलाशने तथा उसकी समृद्ध विरासत को दस्तावेज़ित और संरक्षित करने के उद्देश्य से की गई। यह पहल केवल फिल्मों के प्रचार-प्रसार तक सीमित नहीं है, बल्कि हरियाणवी सिनेमा से जुड़े इतिहास, संस्कृति, कलाकारों, तकनीशियनों, रचनाकारों और उसके बदलते स्वरूप को एक मंच पर लाने का प्रयास है। पुनीत शर्मा का जन्म हरियाणा के जींद जिले के नरवाना शहर में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा नरवाना से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से टूरिज्म मैनेजमेंट में स्नातक तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से टूरिज्म मैनेजमेंट में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। बचपन से ही पुनीत की रुचि हरियाणवी भाषा, लोक संस्कृति, इतिहास और विशेष रूप से हरियाणवी सिनेमा में रही। इसी रुचि ने आगे चलकर उन्हें हरियाणवी सिनेमा के व्यवस्थित अध्ययन और शोध की दिशा में प्रेरित किया। उन्होंने ‘मिशन हरियाणा’ अभियान में मीडिया प्रमुख के रूप में भी कार्य किया, जहाँ हरियाणवी किसानों और ग्रामीण समाज से जुड़ी दुर्लभ जानकारियों को एकत्रित कर व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुँचाने का कार्य किया। 2015 : एक फिल्म से शुरू हुई एक शोध-यात्रा पुनीत शर्मा के लिए वर्ष 2015 हरियाणवी सिनेमा के प्रति उनके गहरे जुड़ाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। इसी वर्ष उन्होंने हरियाणवी फिल्म ‘महारा पीहर सासरा’ देखी। फिल्म का संगीत प्रसिद्ध संगीतकार रवींद्र जैन ने दिया था। इस फिल्म ने उनके भीतर हरियाणवी सिनेमा को जानने और समझने की जिज्ञासा को और गहरा किया। इसके बाद शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे एक गंभीर अध्ययन और शोध-यात्रा में बदल गया। उन्होंने हरियाणवी सिनेमा की पुरानी और नई फिल्मों को तलाशना शुरू किया और कुछ ही समय में बड़ी संख्या में हरियाणवी फिल्मों का अध्ययन किया। पिछले लगभग एक दशक से पुनीत शर्मा हरियाणवी सिनेमा के इतिहास, विकास, फिल्मों, कलाकारों, निर्माण प्रक्रियाओं और बदलते स्वरूप पर निरंतर शोध एवं दस्तावेजी अध्ययन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने अनेक हरियाणवी फिल्मों और वेब सीरीज़ पर समीक्षात्मक लेख लिखे तथा सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए हरियाणवी सिनेमा से जुड़ी अनसुनी, दुर्लभ और महत्वपूर्ण जानकारियों को आम दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास किया। हरियाणवी सिनेमा के एक परिवर्तनशील दशक का दस्तावेज अपने अध्ययन के दौरान पुनीत शर्मा ने महसूस किया कि 2015 से 2025 का दशक हरियाणवी सिनेमा के लिए परिवर्तन, प्रयोग, संघर्ष और विकास का महत्वपूर्ण दौर रहा है। इस अवधि में हरियाणवी सिनेमा ने केवल तकनीकी रूप से ही बदलाव नहीं देखा, बल्कि कहानी, विषय-वस्तु, निर्देशन, अभिनय, छायांकन, संगीत, निर्माण शैली और डिजिटल/OTT माध्यमों के स्तर पर भी महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इसी विचार ने उन्हें इस दशक को एक व्यवस्थित दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। इसी दिशा में वे हरियाणवी सिनेमा के 2015–2025 के परिवर्तनशील दशक पर आधारित एक पुस्तक के लेखन एवं शोध पर कार्य कर रहे हैं। इस पुस्तक का उद्देश्य केवल फिल्मों की सूची प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि इस दौर में हरियाणवी सिनेमा के भीतर आए सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी और रचनात्मक बदलावों को समझना और उन्हें दस्तावेज़ के रूप में संरक्षित करना है। शोध से दस्तावेज़ तक Cinematic Haryana इसी दीर्घकालिक अध्ययन और शोध-यात्रा का विस्तार है। इसका उद्देश्य हरियाणवी सिनेमा की वर्तमान गतिविधियों को सामने लाने के साथ-साथ उसके अतीत को खोजने और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करने का भी है। यह मंच फिल्मों, वेब सीरीज़, कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, लेखकों, तकनीशियनों, संगीतकारों और हरियाणवी मनोरंजन जगत से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों की जानकारी को संकलित करने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके माध्यम से उन कहानियों और उपलब्धियों को भी सामने लाने का प्रयास है, जो मुख्यधारा के इतिहास में कहीं पीछे छूट गई हैं। इस शोध और पुस्तक लेखन की यात्रा में रोशन वर्मा तथा अन्य लेखन गुरुजनों से प्राप्त प्रेरणा, मार्गदर्शन और सहयोग का विशेष महत्व रहा है। उनके मार्गदर्शन ने न केवल इस शोध-यात्रा को दिशा दी, बल्कि लेखन को अधिक गंभीर, व्यवस्थित और शोधपरक बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Cinematic Haryana मेरे लिए केवल एक मंच नहीं, बल्कि हरियाणवी सिनेमा के प्रति एक दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है—एक ऐसी कोशिश, जिसमें सिनेमा को केवल मनोरंजन के रूप में नहीं, बल्कि हरियाणा की भाषा, संस्कृति, समाज, लोक स्मृति और पहचान के महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जाए। पिछले एक दशक की इस शोध-यात्रा से संकलित अनुभव, तथ्य और अध्ययन को पुस्तक के रूप में जल्द ही सुधी पाठकों और हरियाणवी सिनेमा से जुड़े सभी लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का प्रयास है।
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