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शिव की राम भूमि

“शिव की राम भूमि” हरियाणवी सिनेमा की एक ऐसी फिल्म है, जिसमें भाईचारे और भावनाओं को केंद्र में रखा गया है। हरियाणा में बड़े स्तर के दृश्य प्रभाव वाले प्रोजेक्ट्स के लिए सोनी ब्रदर्स स्टूडियो जाना-पहचाना नाम है। बिजेंद्र सोनी और रविंद्र सोनी द्वारा स्थापित इस स्टूडियो ने दृश्य प्रभाव के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है और “शिव की राम भूमि” में भी इसका असर देखने को मिलता है।

फिल्म की कहानी जॉली बाबा ने लिखी है। जॉली बाबा हरियाणवी सिनेमा में अपने काम के लिए जाने जाते हैं और उत्तर कुमार के साथ भी काम कर चुके हैं। हालांकि फिल्म की शुरुआत में कहानी और कुछ दृश्यों में मौलिकता की कमी महसूस होती है। कुछ दृश्य और संवाद पहले की हरियाणवी फिल्मों की याद दिलाते हैं। कॉलेज वाला दृश्य और शुरुआती हास्य दृश्य खास तौर पर कुछ जाने-पहचाने लगते हैं। ऐसे हिस्सों पर लेखन के स्तर पर थोड़ा और काम किया जा सकता था।

फिल्म का निर्देशन बिजेंद्र सोनी ने किया है। कुल मिलाकर उनका निर्देशन अच्छा है और कलाकारों से काम लेने की उनकी कोशिश साफ दिखाई देती है। हालांकि कुछ दृश्यों में कलाकारों का प्रदर्शन जरूरत से ज्यादा प्रभावी हो जाता है, जिसे निर्देशक बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकते थे। कुछ जगह दृश्य-सज्जा और कला निर्देशन की बारीकियों पर भी ध्यान देने की जरूरत महसूस होती है।

फिल्म के छायांकन निर्देशक राजेश हंस हैं, जिन्होंने ज्यादातर दृश्यों को अच्छी तरह फिल्माया है। खासकर अंतिम 30 मिनट में छायांकन ज्यादा प्रभावशाली नजर आता है और फिल्म के माहौल को बेहतर तरीके से सामने रखता है।

फिल्म के कलाकारों का चयन इसके मजबूत पक्षों में से एक है। विजय वर्मा, विक्की काजला, नीतू वर्मा, अजय कुंडू, प्रियंका शर्मा, सुमन सैन, दीपक कपूर, जॉली बाबा, अनूप (रामफल भाई) और राजू मान सहित कलाकारों का चयन कहानी के अनुरूप दिखाई देता है। बिजेंद्र सोनी ने कलाकारों के चयन पर अच्छी मेहनत की है।

फिल्म का पृष्ठभूमि संगीत दिनेश राज ने दिया है। शुरुआती हिस्से में संगीत और दृश्यों के बीच तालमेल कुछ जगह कमजोर लगता है, जिससे फिल्म का प्रभाव कम होता है। हालांकि लगभग 29 मिनट के बाद पृष्ठभूमि संगीत में सुधार दिखाई देता है और आगे चलकर यह कहानी के भावनात्मक हिस्सों को बेहतर तरीके से सहारा देता है।

सोनी ब्रदर्स स्टूडियो की पहचान दृश्य प्रभाव के लिए है और फिल्म के अंतिम हिस्से में यह बात सबसे ज्यादा दिखाई देती है। विजय वर्मा और सोनू कुंडू से जुड़ा तलवार वाला दृश्य प्रभावी है। रविंद्र सोनी ने दृश्य प्रभाव पर अच्छा काम किया है और चरम दृश्य में इसका असर साफ नजर आता है।

अभिनय की बात करें तो विक्की काजला और नीतू वर्मा कई दृश्यों में अच्छा प्रभाव छोड़ते हैं। नीतू वर्मा के भावनात्मक दृश्य खास तौर पर असर पैदा करते हैं। सुमन सैन और दीपक कपूर ने भी अपने किरदारों को अच्छी तरह निभाया है। विजय वर्मा का प्रदर्शन कुल मिलाकर अच्छा है, हालांकि एक-दो दृश्यों में उनका अभिनय थोड़ा जरूरत से ज्यादा लगता है।

कुल मिलाकर “शिव की राम भूमि” में कुछ कमियां जरूर हैं, खासकर शुरुआती लेखन, पृष्ठभूमि संगीत और कुछ दृश्यों की बारीकियों में। लेकिन लगभग एक घंटे के बाद फिल्म दर्शकों से बेहतर तरीके से जुड़ने लगती है। भाईचारे और भावनात्मक जुड़ाव को फिल्म ने अच्छे तरीके से पेश किया है। कलाकारों का चयन, छायांकन और दृश्य प्रभाव इसके मजबूत पक्ष हैं और रविंद्र सोनी का दृश्य प्रभाव वाला काम फिल्म के अंतिम हिस्से को खास बनाता है।