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हरिओम कौशिक – हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री के सफल निर्देशक

पुनीत शर्मा: हरिओम जी, आप हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। कैसा महसूस करते हैं?

हरिओम कौशिक: धन्यवाद। अभी बहुत कुछ करना बाकी है। हरियाणवी सिनेमा के लिए बहुत सारे प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहता हूं। जब अच्छा काम करते हैं तो अच्छा महसूस होता है, लेकिन यह तो बस शुरुआत है।

पुनीत शर्मा: आप हरियाणा में कहां से हैं?

हरिओम कौशिक: मैं जिला महेन्द्रगढ़ के “जाट-पाली” गांव से हूं। मैंने ग्रेजुएशन वहीं से की, फिर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से मास्टर्स किया। इसके बाद SUPVA, रोहतक से एक्टिंग में दोबारा ग्रेजुएशन किया। वहां से पासआउट होने के बाद मुंबई गया, कई प्रोजेक्ट्स किए। लेकिन फिर जब हरियाणा लौटकर काम किया, तो और अच्छा लगा। यहां एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

पुनीत शर्मा: आज हम बात करेंगे आपकी फिल्म *”1600 मीटर”* की, जिसका निर्देशन आपने ही किया है। इस फिल्म की कहानी या थीम आपके दिमाग में कहां से आई?

हरिओम कौशिक: मैं किसी और कहानी पर काम कर रहा था। एक शाम रोहतक के एक खेल मैदान में टहल रहा था। वहां एक लड़का मिला, जो भारतीय सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। वह काफी देर तक मेरे साथ बैठा और अपने संघर्ष की बातें बताता रहा। उसी मुलाकात के बाद मैंने तय किया कि इस विषय पर फिल्म बनानी चाहिए। वहीं से “1600 मीटर” की कहानी मेरे दिमाग में आई और मैंने इस पर काम शुरू किया। 1600 meter

पुनीत शर्मा: यह फिल्म Stage OTT पर रिलीज़ की गई। रिलीज़िंग का अनुभव कैसा रहा?

हरिओम कौशिक: हमने फिल्म को नेशनल अवॉर्ड्स के लिए भेजा था, लेकिन अवॉर्ड नहीं मिला – कोई बात नहीं। फिर फिल्म को Stage OTT पर रिलीज़ किया गया। हरियाणा सरकार से इस फिल्म को 50 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जो मेरे लिए और हरियाणवी सिनेमा के लिए बहुत बड़ी बात थी।

पुनीत शर्मा: फिल्म का प्रोडक्शन हाउस कौन था?

हरिओम कौशिक: इस फिल्म का निर्माण *OM Kaushik Films* ने किया।

पुनीत शर्मा: 1600 मीटर” की अवधि कितनी है?

हरिओम कौशिक: इस फिल्म की कुल अवधि 106 मिनट है।

पुनीत शर्मा: फिल्म की शूटिंग कहां हुई थी?

हरिओम कौशिक: पूरी फिल्म महेन्द्रगढ़ जिले में ही शूट की गई है।

पुनीत शर्मा: शूटिंग में कुल कितने दिन लगे?

हरिओम कौशिक: करीब *16 दिनतक शूटिंग चली। 1600 meter

पुनीत शर्मा: शूटिंग के दौरान कोई खास चुनौती रही?

हरिओम कौशिक: क्योंकि शूटिंग मेरे अपने गांव और आस-पास के इलाकों में हुई, इसलिए ज़्यादा दिक्कत नहीं आई। हरियाणा के लोगों ने बहुत सहयोग किया और ढेर सारा प्यार मिला। हां, मुंबई से जो टीम आई थी, उनके रहने-सहने को लेकर थोड़ी बहुत समस्याएं आईं, लेकिन बाकी सब ठीक रहा।

पुनीत शर्मा: क्या आपने इस फिल्म को थिएटर में रिलीज़ करने का नहीं सोचा?

हरिओम कौशिक: मैंने सोचा था, लेकिन Stage OTT मेरे लिए एक कंफर्ट ज़ोन जैसा है। यह एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, और मुझे लगा कि इस फिल्म को वहीं रिलीज़ करना बेहतर रहेगा।

पुनीत शर्मा: आपने “मलाल” और “ओपरी हवा” (रंजीत चौहान द्वारा निर्देशित) में काम किया, और फिर “1600 मीटर” बनाई। हमने देखा कि इसमें आपकी लगभग वही टीम थी?

हरिओम कौशिक: मैं हर प्रोजेक्ट में 60–70% टीम बदलता हूं। कुछ एक्टर्स ऐसे होते हैं जिनका विकल्प नहीं होता, इसलिए उन्हें दोहराना पड़ता है। लेकिन क्वालिटी के साथ कभी समझौता नहीं करता।

पुनीत शर्मा: आपको हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री का भविष्य कैसा लगता है?

हरिओम कौशिक: हमें तकनीकी पक्ष पर ध्यान देना होगा। एक बेहतर फिल्म इंडस्ट्री के लिए अच्छे और सशक्त प्रोजेक्ट्स बनाने होंगे। तभी हरियाणवी सिनेमा का भविष्य उज्ज्वल हो सकता है।

पुनीत शर्मा: बहुत-बहुत धन्यवाद हरिओम जी, आपने अपना समय दिया। हम आपको आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए शुभकामनाएं देते हैं।

हरिओम कौशिक: धन्यवाद, आपका भी बहुत आभार।