विनोद पनिहारी
कलाकार
विनोद पनिहारी हरियाणवी लोककला, रागनी, अभिनय और क्षेत्रीय वेब सीरीज के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कलाकार हैं। उनका जन्म 6 सितंबर 1986 को जींद के निकट स्थित पनिहारी गांव में हुआ। उनके पिता का नाम श्री दलवीर सिंह तथा माता का नाम श्रीमती मूर्ति देवी है। ग्रामीण परिवेश और हरियाणवी लोकसंस्कृति से उनका गहरा जुड़ाव उनके कला-सफर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक रहा है।
विनोद पनिहारी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद बी.ए., एम.ए. तथा PGDCA की शिक्षा राजकीय महाविद्यालय, जींद से प्राप्त की। शिक्षा के साथ-साथ उनका रुझान शुरू से ही हरियाणवी लोककला और अभिनय की ओर रहा। उन्होंने हरियाणवी रंगमंच और लोक परंपरा को करीब से समझते हुए अपनी कला को विकसित किया।
लोककला के क्षेत्र में उन्होंने प्रसिद्ध हरियाणवी हास्य एवं रंगमंच कलाकार रमेश रांडा को अपना गुरु माना है। उनके मार्गदर्शन में विनोद पनिहारी ने मंचीय प्रस्तुति, संवाद-अदायगी और हरियाणवी लोक-अभिनय की बारीकियों को सीखा। यही प्रशिक्षण आगे चलकर उनके अभिनय और रागनी प्रस्तुतियों में दिखाई देता है।
इसके अतिरिक्त उन्होंने हास्य कलाकार, अभिनेता और लेखक श्री राम मेहर सिंह रांडा से भी ज्ञान प्राप्त किया है। आज भी वे उनके साथ "नशा मुक्त देश", "बेटी बढ़ाओ-बेटी पढ़ाओ" जैसे सामाजिक अभियानों के अंतर्गत उनके नक्शे-कदम पर चल रहे हैं और समाज को जागरूक करने का कार्य कर रहे हैं।
सांग का मंचन करने के कारण विनोद पनिहारी को "युवा सांगी विनोद पनिहारी" के नाम से भी जाना जाता है, जो उनकी लोककला के प्रति गहरी निष्ठा और समर्पण का प्रतीक है।
रागनी और मंचीय सफर
विनोद पनिहारी ने लगभग 2008-09 के आसपास से हरियाणवी सांग और लोकमंच से अपने कलात्मक सफर को आगे बढ़ाया। उन्होंने विभिन्न हरियाणवी सांगों में अभिनय और गायन किया तथा कई प्रस्तुतियों में लाइव परफॉर्मेंस भी दी। उनके मंचीय काम में 'सेठ ताराचंद', 'लीलो चमन', 'चाप सिंह सोमवती' और 'पिंगला भरथरी' जैसी लोककथात्मक एवं रागनी-आधारित प्रस्तुतियां उल्लेखनीय हैं।
उनकी कला की खासियत यह है कि वे केवल संवाद बोलने या रागनी प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पात्र के स्वभाव, उसकी भाषा और हरियाणवी परिवेश को अपनी प्रस्तुति में स्वाभाविक रूप से उतारने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि मंच से लेकर डिजिटल माध्यम तक उनकी अभिनय शैली में लोक रंग की स्पष्ट झलक दिखाई देती है।
वेब सीरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म
हरियाणवी मनोरंजन के डिजिटल विस्तार के साथ विनोद पनिहारी ने STAGE OTT जैसे क्षेत्रीय मंचों पर भी काम किया। उन्होंने विभिन्न वेब सीरीज, नाटकों और कॉमेडी-ड्रामा में अभिनय किया है।
उनके प्रमुख डिजिटल कार्यों में 'पिंगला भरथरी' (2020), 'हीर रांझा की फुटकार रागणियां' (2021) और 'सेफ हाउस 2' (2023) जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। इसके अलावा 'बहुआ की सरकार' और 'बुढ़िया थानेदार' जैसे क्षेत्रीय शो और कॉमेडी-ड्रामा में भी उन्होंने अपनी अभिनय प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
विशेष रूप से 'सेफ हाउस' सीरीज में उनके काम को दर्शकों के बीच सराहना मिली। एक ही सीरीज में अलग-अलग कलाकारों और पात्रों के बीच अपनी भूमिका को प्रभावी ढंग से निभाना उनके अभिनय कौशल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में माना जा सकता है।
हरियाणवी रागनी और संगीत
अभिनय के साथ-साथ विनोद पनिहारी का जुड़ाव गायन और हरियाणवी रागनी से भी रहा है। उनके संगीत से जुड़े कार्यों में 'या बम लहरी', 'कैलाश का राजा', 'शिव भोला', 'तेरे दर पे आया' और 'फक्कड़' जैसे गीत शामिल हैं।
उनकी प्रस्तुतियों में पारंपरिक हरियाणवी लोकभाषा और आधुनिक प्रस्तुति शैली का मेल दिखाई देता है। इसी क्रम में हरियाणा की पहली AI-आधारित सीरीज 'दादा छोटूराम' से जुड़े उनके काम को भी उल्लेखनीय माना जा सकता है। इस प्रोजेक्ट में उनकी आधुनिक अंदाज में प्रस्तुत रागनी 'बण में रह्या करूं' को नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच अच्छी प्रतिक्रिया मिली और यह उदाहरण है कि किस तरह पारंपरिक रागनी को आधुनिक डिजिटल माध्यम और नई प्रस्तुति शैली के साथ जोड़ा जा सकता है।
वर्तमान में
कला और अभिनय के साथ विनोद पनिहारी अपने पेशेवर जीवन में भी सक्रिय हैं। वर्तमान में वे भारतीय स्टेट बैंक (SBI), जींद में ग्राहक संपर्क अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। बैंकिंग जैसे पेशेवर क्षेत्र में जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ उन्होंने हरियाणवी लोककला और मनोरंजन जगत से अपना संबंध बनाए रखा है।
विनोद पनिहारी की यात्रा इस मायने में खास है कि उन्होंने गांव के लोकमंच और सांग से लेकर आधुनिक OTT तथा डिजिटल मनोरंजन तक का सफर तय किया है। उनके लिए हरियाणवी कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, बोली और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का एक माध्यम भी है। परंपरागत रागनी और आधुनिक डिजिटल माध्यम के बीच उनका यह सफर हरियाणवी मनोरंजन के बदलते स्वरूप की एक दिलचस्प तस्वीर प्रस्तुत करता है।