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डॉ. जगबीर राठी

हरियाणा की लोक संस्कृति और कविता की सशक्त आवाज़

परिचय

डॉ. जगबीर राठी हरियाणा की लोक संस्कृति, हास्य, देशभक्ति और सामाजिक चेतना के प्रसिद्ध कवि, लेखक, अभिनेता तथा सांस्कृतिक व्यक्तित्व हैं। उनका जन्म 1 मई 1964 को हरियाणा के जिला जींद की तहसील जुलाना के गांव बख्ता खेड़ा में हुआ। उनके पिता का नाम श्री जिले सिंह राठी और उनकी माता श्रीमती ओमवती राठी है बचपन से ही साहित्य, संगीत और मंच कला के प्रति उनकी विशेष रुचि रही, जिसने आगे चलकर उन्हें हरियाणवी साहित्य और सांस्कृतिक जगत का एक जाना-माना नाम बना दिया।डॉ. जगबीर राठी ने एम.ए. (इंग्लिश), एम.एम.सी. तथा फोक मीडिया में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की। वे लंबे समय तक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में डायरेक्टर यूथ वेलफेयर के पद पर कार्यरत रहे। उन्होंने शिक्षा और संस्कृति दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान

डॉ. जगबीर राठी ने हरियाणवी और हिंदी साहित्य को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने देशभक्ति, सामाजिक जागरूकता, ग्रामीण जीवन, हास्य और लोक संस्कृति पर आधारित कविताओं का मंचों पर प्रभावशाली पाठ किया। वे अब तक भारतभर में 2000 से अधिक कवि सम्मेलनों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।उनकी कविताओं में हरियाणा की मिट्टी की खुशबू, ग्रामीण जीवन की सादगी और समाज के प्रति संवेदनशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी मंचीय प्रस्तुति शैली हास्य, व्यंग्य और भावनात्मक अभिव्यक्ति से भरपूर होती है, जिसके कारण वे श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं। प्रमुख उपलब्धियां

कॉलेज, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर संगीत, नृत्य, नाटक, साहित्य और ललित कला में लगभग 300 पुरस्कार प्राप्त; हास्य व लोक संगीत पर आधारित 35 हरियाणवी एल्बम जारी; डीडी नेशनल, जी टीवी, डीडी मेट्रो और डीडी हिसार के धारावाहिकों में लेखक एवं निर्देशक; फिल्म “दंगल” (2016) सहित अनेक हरियाणवी एवं हिंदी फिल्मों में अभिनय; हरियाणवी लोक संस्कृति को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान; लोकप्रिय गीत—बोल तेरे मीठे मीठे, छोटी सी बनड़ी, पिया जी, जब यार नचावे; चर्चित नाटक—देश न बचा ल्यो र, दो वर्दियाँ, दुखीराम का ढाबा; प्रकाशित पुस्तकें—चुप चाप चिड़ी का बाप, बिदाई के गीत, माटी का चूल्हा, युद्धवीर (उपन्यास); संपादित पुस्तकें—बाजे भगत, पं. जगन्नाथ रचनावली; तथा अभिनीत फ़िल्में—पनघट (1985), खानदानी सरपंच (1990), कैंप बनवास, दंगल (2016), भाईचारा, दिल होगा लापता, जालिमपुर, देसी, बाँहें, विरोध, डाकी, राख, चॉप चॉप, सराभा, बोगा भगत, मुआवजा, बैंगन, विदेशी बहू, रायता, डकैतखाना, सितारे ज़मीन पर, राउडी राल्दू, दंड और देवदास सिंड्रोम।

डॉ. जगबीर राठी ने अमेरिका, ओमान, थाईलैंड, पाकिस्तान, यूनाइटेड किंगडम और जापान सहित कई देशों में हरियाणवी एवं हिंदी कविता का प्रतिनिधित्व करते हुए कवि सम्मेलनों में भाग लिया तथा साहित्य, संस्कृति और रंगमंच में उल्लेखनीय योगदान के लिए शिखर सम्मान, सरस्वती पुरस्कार, हरियाणवी लोक रंग सम्मान, कलामदंश सम्मान, साहित्य शिखर सम्मान, पंडित लखमीचंद सम्मान, हरियाणा रत्न सम्मान, हास्य सम्राट सम्मान, राजेश चेतन काव्य पुरस्कार, पी.डी. रंग सम्मान और लखमीचंद रास रंग सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित हुए।

व्यक्तित्व

डॉ. जगबीर राठी केवल एक कवि ही नहीं बल्कि हरियाणा की लोक संस्कृति के संवाहक हैं। उन्होंने अपनी लेखनी और मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से समाज को जागरूक करने, लोक परंपराओं को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया है। संपर्क

डॉ. जगबीर राठी गांव – बख्ता खेड़ा, तहसील जुलाना, जिला जींद, हरियाणानिवास पता –1199-P, सेक्टर-4 एक्सटेंशन, सैनिक पथ, रोहतक, हरियाणा ईमेल – jagbirrathee@rediffmail.com