संदीप शर्मा: जींद की मिट्टी से निकला एक सतरंगी सितारा

हरियाणा की धरती, विशेषकर जींद जिले की, हमेशा से वीरों और प्रतिभाओं की जननी रही है। इसी धरती पर 3 अगस्त 1968 को जन्मे संदीप शर्मा ने अपने जुनून, मेहनत और समर्पण के दम पर न केवल हरियाणा, बल्कि पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई।

सपनों की शुरुआत:

एक साधारण परिवार से खास मुकाम तक संदीप शर्मा का जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ। बचपन से ही उन्हें अभिनय (Acting) का शौक था। पढ़ाई के दौरान वे लगातार सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते रहे। हालांकि पारिवारिक पृष्ठभूमि अभिनय से दूर थी, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने जुनून को ही जीवन का लक्ष्य बना लिया।
खेतीबाड़ी के काम में हाथ बंटाने के साथ-साथ वे लगातार थिएटर और अभिनय की दुनिया में खुद को आजमाते रहे। अपने लक्ष्य को गंभीरता से लेते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी से थिएटर में डिग्री हासिल की और फिर मुंबई का रुख किया।

मुंबई में संघर्ष और शुरुआत

मुंबई आकर उन्होंने रवि राय जैसे बड़े निर्देशकों के साथ काम किया। 1994 में DD मेट्रो पर प्रसारित एक सीरियल इम्तिहान से उन्होंने पहली बार कैमरे का सामना किया। इसके बाद उन्होंने ‘”जी टी वी के मीत, गोपाल जी, हीना, ज़ीनत, ‘रेत का दरिया, हेलो इंस्पेक्टर, जाने क्या बात हुई जैसे कई हिंदी धारावाहिकों में काम किया। हिंदी फिल्म, महेश भट्ट की फिल्म तमन्ना, अनुराग बासु की फिल्म साया, मेट्रो… इन दिनों में, हरियाणवी फिल्म लाडो, 1600 मीटर, फौजा में भी काम किया
हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान

sandeep sharma haryyanvi kalakar

हरविंदर मालिक के निर्देशन में बने एल्बम ‘देसी का प्वा’ में शामिल हरियाणवी सैड सॉन्ग ‘जब याद तेरी आवे’ में संदीप शर्मा की शानदार अदाकारी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। निर्देशन की दुनिया में कदम सिर्फ अभिनय ही नहीं, संदीप शर्मा ने डायरेक्शन में भी अपने हुनर का लोहा मनवाया। उन्होंने ‘रिश्ते, लव स्टोरी, लेफ्ट राइट लेफ्ट, दिल मिल गए, मिले जब हम तुम, गीत ही सबसे पराई , शपथ, नादान परिंदे, 12/24 करोल बाग, लाल इश्क, मौका ए वारदात’ जैसे सीरियल्स में निर्देशन का काम संभाला। एक हादसा, एक आइडिया और ‘सतरंगी’

एक बार खेलते समय उन्हें दिल में तकलीफ की वजह से अस्पताल में I C U में रहना पड़ा। लेकिन एक सच्चे कलाकार का दिमाग कभी रुकता नहीं — दिमाग में यही चलता रहा कि बॉम्बे फिल्म बनाने आया था, फिल्म तो अभी तक बनाई ही नहीं। तो निर्णय लिया कि अगर हॉस्पिटल से सही निकल आया तो एक फिल्म तो जरूर बनाऊंगा, और पूरे एक साल के अंदर भगवान की कृपा से फिल्म बन गई सतरंगी। जो समाज में देखे गए कुछ सच्ची घटनाओं से प्रेरित थी।

सिर्फ अभिनय ही नहीं, संदीप शर्मा ने निर्देशन (Direction) में भी अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने लोकप्रिय सीरियल्स जैसे:

“रिश्ते”

“शपथ

“नादान परिंदे”

“करोल बाग”

“लव स्टोरी”

जैसे शो में निर्देशन का काम संभाला और दर्शकों से खूब सराहना पाई।

एक चोट बनी प्रेरणा, और बनी फिल्म “सतरंगी”


OTT पर भी छाए संदीप शर्मा

इस फिल्म में एक ऐसा विषय उठाया गया है, जो समाज में बहुत कम दिखाया जाता है – एक बेटी का अपने पिता के लिए त्याग और ज़िम्मेदारी। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक बेटी, अपनी शादी से पहले इस बात को लेकर चिंतित होती है कि उसके जाने के बाद उसका पिता अकेला न रह जाए। उसे पता चल जाता है कि उसका भाई अपने पिता को धोखा दे चुका है। ऐसे में वह खुद अपनी शादी को टाल देती है और कुछ समय अपने पिता के साथ बिताने का निर्णय लेती है।

इस फिल्म की शूटिंग जींद, कालवा गाँव और करनाल में मात्र 16 दिनों में पूरी की गई। अनुभव के कारण वे हर शॉट को बेहतरीन तरीके से निर्देशित कर सके। इस फिल्म का निर्माण संदीप शर्मा और उनकी पत्नी पूनम देशवाल शर्मा ने किया, और इसमें यशपाल शर्मा, गीता अग्रवाल शर्मा, महावीर गुड्डू, सागर सैनी,नरगिस नांदल, सचिन शौकीन, नवीन ओल्ह्यान, अमित जैरथ जैसे उम्दा कलाकारों ने अभिनय किया।

“सतरंगी” ने 63वें राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। इसके अलावा 2016 के हरियाणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इसने 6 अलग-अलग कैटेगरी में पुरस्कार प्राप्त किए।

संदीप शर्मा की अभिनय प्रतिभा सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रही। OTT प्लेटफॉर्म ‘Stage’ पर आई हरियाणवी सीरीज घर की बात “बहू काले की चौपाल” में उनकी कॉमिक टाइमिंग और सशक्त अभिनय ने दर्शकों का दिल जीत लिया।

” कॉलेज कांड, ओपरी पराई, जर, जोरू, जमीन “में भी उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा गया। इसके साथ ही उन्होंने फीचर फिल्म “नंगे पांव” का निर्देशन भी किया।

नवीनतम फिल्म: “रंगीली” – हार मत मानो!

“सतरंगी” के बाद संदीप शर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म “रंगीली” एक और प्रेरणादायक कृति रही। इस फिल्म ने संदेश दिया कि “किसी भी हालात में हार नहीं माननी चाहिए”।
फिल्म रंगीली की कहानी एक ऐसे पिता की है * (भूमिका में संदीप शर्मा) है, जिसके दोनों बेटे अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। यह फिल्म दिखाती है कि कैसे एक पिता अपने बच्चों की ज़िंदगी में फिर से “रौशनी” भरने का प्रयास करता है।

निर्माता: पूनम देशवाल शर्मा एवं संदीप शर्मा

कहानी एवं पटकथा: संदीप शर्मा
संवाद: वी एम बेचैन गीतकार कृष्ण भारद्वाज
संगीत: हरेंद्र भारद्वाज और डार्क बीट                                                                                                                                                                                                              स्टूडियो कैमरा: राहुल गरासिया
एडिटर: बी रामपाल

रिलीज़ प्लेटफॉर्म: Stage OTT

रिलीज़ तिथि: 25 जुलाई 2025

फिल्म ने दर्शकों को एक प्रेरणादायक संदेश दिया और ये साबित किया कि संदीप शर्मा ना सिर्फ एक बेहतरीन कलाकार हैं, बल्कि एक संवेदनशील और सामाजिक रूप से जागरूक निर्देशक भी हैं।

सादगी और जड़ों से जुड़ाव – जींद की माटी से जुड़ाव आज भी बरकरार

मुंबई में रहने के बावजूद संदीप शर्मा आज भी जब जींद लौटते हैं, तो खेतों में जाकर कृषि कार्य करते हैं। उनका मानना है कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। आज भी उनका खेल और खेती के प्रति वही प्रेम बना हुआ है। संदीप शर्मा आज सिर्फ हरियाणवी सिनेमा में एक बड़ा नाम बन चुके हैं। उनकी ज़िंदगी हमें यह सिखाती है कि सपने चाहे जितने भी बड़े क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो और मेहनत ईमानदार — तो मंज़िल जरूर मिलती है।
संदीप शर्मा की कहानी एक ऐसे इंसान की कहानी है जिसने सीमित संसाधनों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद अपना सपना जिया और समाज को अभिनय, लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में बेहतरीन रचनाएं दीं। वे आज हरियाणा और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं।

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