"बहू काले की" - एक बेहतरीन हरियाणवी कॉमेडी ड्रामा

अगर आप हरियाणवी में बेहतरीन मनोरंजन की तलाश में हैं, तो चौपाल पर बहू काले की एक मजेदार और दिलचस्प अनुभव है। ओम कौशिक फिल्म्स द्वारा निर्मित यह सीरीज न केवल हास्य से भरपूर है, बल्कि परिवार के साथ देखने लायक भी है।

कहानी और पटकथा -

कहानी हरिओम कौशिक द्वारा लिखी गई है, जो दर्शकों को चौपाल के माध्यम से एक साधारण लेकिन मजेदार ग्रामीण कहानी में डुबो देती है। रंजीत चौहान की पटकथा और राजकुमार धनखड़ के संवाद इस सीरीज की मजबूती हैं। खासकर, काले की अंग्रेजी में कमजोरी और उसका कोर्ट से बचने का तरीका दर्शकों को हंसी के फव्वारे में डुबो देता है। इस सरल लेकिन सशक्त कथा को सटीक रूप से पेश किया गया है।

(दृश्य और संपादन (DOP & Editing) -

विनोद पाराशर का कैमरा वर्क और विनोद राव का संपादन सीरीज की खूबसूरती को बढ़ाते हैं। दोनों का समन्वय इस परियोजना में देखे जाने लायक है। कैमरा काम के दौरान, हरियाणा की संपूर्ण परंपराओं और परिवेश को शानदार तरीके से प्रस्तुत किया गया है।

कास्टिंग: दमदार और प्रभावशाली -

ओम कौशिक फिल्म्स की कास्टिंग हमेशा से बेहतरीन रही है और “बहू काले की” में भी यह अलग नहीं है। नीतू लोहचब, संदीप शर्मा, शशि कल्याण, पंकज पलवलियां, रेणु दुहान, राहुल पंडित, शमशेर सिंह सेम, धर्मेंद्र दांगी, मानवी भारद्वाज, रंजीत चौहान और अभिमन्यु यादव ने अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी है। काले के परिवार के सदस्य हो या चौपाल के औरत-पुरुष, सभी ने अपनी भूमिका को बेहद सजीव तरीके से निभाया है।

कॉस्ट्यूम और आर्ट डायरेक्शन -

रामावतार (संदीप शर्मा) द्वारा पहने गए मोज़े और पवन कौशिक के आर्ट डायरेक्शन में किया गया काम शो के सौंदर्यशास्त्र को और भी प्रभावी बनाता है। इस शो में पारंपरिक हरियाणवी रंगों और परिधानों को बखूबी दर्शाया गया है।

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संगीत और साउंड डिज़ाइन -

सीरीज का बैकग्राउंड स्कोर तबला संगीत से समृद्ध है, जो इसकी आत्मा को दर्शाता है। “बैकबोन” गाने का संगीत बहुत ही आकर्षक है, जो सीरीज की भावना को और बढ़ा देता है। साउंड डिज़ाइन के मामले में, नीरज रोहिला का योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने हरियाणा की मिट्टी की आहट और परिवेश को ऐसे साउंड इफेक्ट्स से पूरा किया है कि यह दर्शकों को पूरी तरह से घेर लेता है। खासकर, सुहाग रात के दृश्य में खाट की टूटने की आवाज़ ने इसे और भी सजीव बना दिया है।

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शशि कल्याण का अद्वितीय किरदार -

“बहू काले की” में शशि कल्याण द्वारा निभाए गए काले की माँ के किरदार ने विशेष रूप से हरियाणवी बोली और भावनाओं को शानदार तरीके से प्रस्तुत किया है। उनकी अदाकारी न केवल हरियाणा की संस्कृति को दिखाती है, बल्कि उनका अभिनय दोनों मां और नकारात्मक किरदार के बीच एक बेहतरीन संतुलन को प्रदर्शित करता है।

समाप्ति: चौपाल की स्वतंत्रता और प्रचार -

चौपाल जैसे प्लेटफ़ॉर्म को यह सीरीज एक नई ऊंचाई तक लेकर जाती है। हालांकि, इसे और अधिक दर्शकों तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत प्रचार रणनीति की जरूरत है। हरियाणा में इस प्रकार की फिल्मों और सीरीज का प्रचार करना महत्वपूर्ण है ताकि यह परियोजना अपनी पूरी क्षमता को दर्शकों के बीच पहचान सके।

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