वेब रिव्यू- ‘कच्छाधारी’ सब पर भारी!

06 सितंबर को ओटीटी चौपाल पर रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ कच्छाधारी ने पूरे हरियाणा में सनसनी फैला दी। कहा जाता है- जब लोग आपके बारे में कुछ भी कहें, उस समय शांत रहकर काम पर ध्यान दें, तब आपका काम ही उत्तर देता है। ठीक वैसा ही किया चिराग ने इस वेब सीरीज़ से।

कहानी और पटकथा -

कच्छाधारी की कहानी सतवीर वैरागी ने लिखी है। पूरी सीरीज़ का पटकथा इस ढंग से बुना गया है कि दर्शक को एक क्षण के लिए भी ऊब महसूस नहीं होती। चिराग भसीन के अब तक के सभी प्रकल्पों में सबसे बेहतरीन पटकथा कच्छाधारी की ही कही जाएगी।

निर्देशन -

निर्देशन स्वयं चिराग भसीन ने किया है। हर दृश्य में शॉट-दर-शॉट परिपूर्णता नज़र आती है। इससे स्पष्ट है कि उन्होंने निर्देशन से पहले काफ़ी काग़ज़ी तैयारी की होगी। बड़े दोष कहीं दिखाई नहीं देते।

छायांकन-

kachadhari review

   छायांकन निर्देशक शुभ संधु ने तपती धूप में झुग्गी के बीच कैमरे को बार-बार फ्रेम-दर-फ्रेम संभाला। स्कैम जैसे प्रकल्प की कमियों को इस बार सुधारा गया। ड्रोन शॉट्स, पशॉट्स, क्लोज़अप –       हर दृश्य में संधु का कार्य सराहनीय है।

kachadhari review

अभिनय और कास्टिंग -

नरेन्द्र सिंह यादव (मनीष), हिम्मत दयोहरा (जोसफ़), संजीव शर्मा (गौरव) तथा मानवीर भारद्वाज ने अपने पात्रों को सजीव कर दिया। अपराध के अलग-अलग आयाम लिए तीनों जब अपनी गैंग के साथ स्कॉर्पियो से उतरते हैं तो उनकी बॉडी लैंग्वेज क़ाबिले-तारीफ़ है।

चिराग भसीन प्रोडक्शन के सभी प्रकल्पों में यह अब तक की सबसे मज़बूत कास्टिंग कही जाएगी। सोनू सीलन की बॉडी लैंग्वेज परफ़ेक्ट है। जेडी ब्लू ने भी न्याय किया। चाइल्ड कास्टिंग वास्तविक लगी।

सुदीप सांगवान, जो वास्तविक जीवन में हरियाणा पुलिस के अधिकारी हैं, पहली बार कैमरे पर आए और बिल्कुल सहज लगे। उनका संवाद – “घर ने चारो तरफ़ त घेर ल्यो – मारो बहनचो…” पहले से ही वायरल हो चुका है।

राजस्थानी पात्रों की कास्टिंग भी उत्कृष्ट रही। अतुल (पटवारी) सहित अन्य कलाकारों ने राजस्थानी भाषा का सही पकड़ के साथ अभिनय किया।

गीतू परी इस सीरीज़ की विशेष उपलब्धि हैं। उनकी साड़ी का रंग जहाँ जीवन की रंगीनी का आभास कराता है, वहीं सितारा के काले कारनामों का प्रतीक भी बनता है। संगीता देवी (पुलिस कांस्टेबल) और इन्द्र सिंह लांबा (रागनी कलाकार से पुलिस किरदार में) ने भी छाप छोड़ी।

अन्य कलाकारों में अमर कटारिया (भान सिंह), इन्द्र सिंह लांबा (रंजीत), अनिल जांगड़ा (रतन), प्रगति सिंह (रोज़ी), चिराग बी (लीलू गैंगस्टर), दिशांत गुल्लिया (विक्रम), प्रिंस कराड़ (योगी), संगीता जांगड़ा (शीला देवी), सोनू जांगड़ा (सीलू), मानवी भारद्वाज (श्वेता), अजय अहलावत (इंस्पेक्टर अविनाश), लोकेश विवेक (डेविड), डॉ. संदीप कल्याण (जोगिंदर), सतबीर वैरागी (महेंद्र) आदि ने भी सशक्त अभिनय किया।

पृष्ठभूमि संगीत -

हरियाणा में बीजीएम की चर्चा हो तो अभिषेक पंडित का नाम सबसे पहले आता है। उनका संगीत सीरीज़ को आरम्भ से अंत तक बाँधे रखता है। टाइटल ट्रैक विनु गौर, सोमवीर कथूरवाल और कविता संभू ने गाया है। विनु गौर की पृष्ठभूमि गायकी सीरीज़ की पहचान बन गई।

संपादन और रंग संयोजन -

सीनियर संपादक संजय भसीन के नेतृत्व में ज्ञानेश और सतीक ने संपादन और रंग संयोजन में कोई कमी नहीं छोड़ी। तकनीकी पक्ष पूरी तरह सुदृढ़ रहा।

परिधान और श्रृंगार -

कोमल सरोहा ने परिधान डिज़ाइन किए। पुलिस वर्दी से लेकर बेल्ट तक हर सूक्ष्मता पर ध्यान दिया गया। हेयर विभाग तृप्ति ने संभाला। सतीश कश्यप का हेयर स्टाइल उनके पात्र की प्रवृत्ति को स्पष्ट कर देता है।

कला निर्देशन -

व्योम ने आर्ट वर्क को असली जैसा रूप दिया। तलवार, चाकू, रक्तस्राव – सब कुछ वास्तविक प्रतीत हुआ। परवीन खासा, मनोज और अक्षय ने भी योगदान दिया।

प्रकाश व्यवस्था -

आलोक व्यवस्था प्रमुख अश्विनी जांडू ने अपने दल (तेरा धीलु, जीता गिल, रिंकु, रणजीत आदि) के साथ पेशेवराना ढंग से कार्य किया। मात्र दस सेकंड के दृश्य के लिए बारह लाइटें लगाई गईं, यह उनकी गंभीरता दर्शाता है।

दृश्य प्रभाव (वीएफ़एक्स) -

गोली लगने वाले दृश्यों में हिमांशु ठाकुर ने ऐसा कार्य किया कि कहीं भी नक़लीपन नज़र नहीं आया।

kachadhari review
kachadhari review

निष्कर्ष -

कच्छाधारी हरियाणवी वेब सीरीज़ की दिशा में एक बड़ा कदम है। सशक्त कहानी, चुस्त पटकथा, उम्दा अभिनय, उत्कृष्ट छायांकन और तकनीकी पक्षों की पूर्णता ने इसे यादगार बना दिया। चिराग भसीन और उनकी टीम ने यह प्रमाणित किया है कि अगर संकल्प मज़बूत हो और कार्य में प्रोफ़ेशनलिज़्म हो तो हरियाणा भी उच्च स्तरीय वेब कंटेंट प्रस्तुत कर सकता है।

Scroll to Top