हरियाणवी लोकनायक पंडित लखमीचंद के संघर्ष और विरासत को समर्पित एक ऐतिहासिक फिल्म
दादा लख्मी वर्ष 2022 में रिलीज़ हुई एक जीवनीपरक (Biographical) हरियाणवी फिल्म है, जो हरियाणा के महान लोकनायक, सांग सम्राट और रागिनी सम्राट पंडित लखमीचंद के जीवन पर आधारित है। यह फिल्म हरियाणवी लोककला, सांग और रागिनी की समृद्ध परंपरा को बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। अभिनेता यशपाल शर्मा ने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने के साथ-साथ पहली बार निर्देशक के रूप में भी कदम रखा। उनके निर्देशन की यह पहली फिल्म थी। फिल्म के एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर रामपाल बल्हारा हैं।
फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी हरियाणा के महान लोककवि और सांग सम्राट पंडित लखमीचंद के वास्तविक जीवन पर आधारित है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मे लखमीचंद बचपन से ही लोककला और संगीत के प्रति आकर्षित थे। समाज और परिवार के विरोध के बावजूद उन्होंने कला का रास्ता चुना और कठिन संघर्ष, अथक मेहनत तथा अपनी अद्भुत प्रतिभा के बल पर हरियाणा के सबसे लोकप्रिय लोक कलाकार बने। फिल्म में उनके जीवन संघर्ष, सांग एवं रागिनी के प्रति समर्पण तथा हरियाणवी संस्कृति को नई पहचान दिलाने की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाया गया है। हरियाणवी सांग और रागिनी को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए उन्हें ‘सूर्य हार’ से सम्मानित किए जाने का प्रसंग भी फिल्म में प्रमुखता से दिखाया गया है।
निर्माण
फिल्म का निर्माण Anhad Studio Pvt. Ltd. तथा Yashvidya Films के बैनर तले किया गया।
प्रमुख तकनीकी दल
निर्देशक – यशपाल शर्मा
लेखक – राजू मान
एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर – रामपाल बल्हारा
छायांकन (प्रथम चरण) – सुप्रतिम भोल
छायांकन (द्वितीय चरण) – विकास शर्मा (SUPVA पासआउट)
संपादन – असीम सिन्हा, राहुल तिवारी
संगीत – उत्तम सिंह
कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर – माला डे
आर्ट डायरेक्टर – गिरिजा शंकर
कलाकार
यशपाल शर्मा – पंडित लखमीचंद
हितेश शर्मा – युवा लखमीचंद
मेघना मलिक
राजेंद्र गुप्ता
योगेश भारद्वाज – पंडित जी
राजेंद्र भाटिया – वैद्य
तनिष्क चौधरी – फेकू
विक्रम मलिक – शंकर
नवीन निषाद – सांगी
अमित पहल – धुलिया खान
फिल्म की शूटिंग
फिल्म की शूटिंग वर्ष 2019 में प्रारंभ हुई। पहला शूटिंग शेड्यूल सिरसा जिले के गांव जमाल तथा आसपास के गांवों और चोखा धाणी में फिल्माया गया। पहले चरण की शूटिंग लगभग 45 दिनों तक चली।
फिल्म की कहानी लगभग 80 वर्ष पुराने हरियाणा को दर्शाती है, इसलिए ऐसे गांवों का चयन किया गया जहाँ पुराने कच्चे मकानों का वातावरण उपलब्ध हो। जिन मकानों पर आधुनिक निर्माण था, उन्हें भी मिट्टी और रेत की सहायता से कच्चा रूप दिया गया ताकि उस समय का वास्तविक परिवेश दिखाई दे।
शूटिंग के दौरान गांव के लोगों से अनुरोध किया गया था कि यदि वे शूटिंग स्थल पर कैमरे के सामने आएँ तो धोती, कुर्ता-पायजामा जैसे पारंपरिक वस्त्र पहनकर आएँ, जिससे किसी भी दृश्य में आधुनिकता दिखाई न दे। जिन घरों की छतों पर पानी की टंकियाँ थीं, वहाँ ड्रोन कैमरे के एंगल इस प्रकार तय किए गए कि टंकियाँ फ्रेम में दिखाई न दें।
फिल्म की शूटिंग लगभग 48 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी में की गई। तेज गर्मी के कारण कई बार कैमरे भी गर्म हो गए, लेकिन कलाकारों और तकनीकी टीम ने बिना रुके अपना कार्य जारी रखा।
सांग से जुड़े दृश्यों की शूटिंग सोनीपत जिले के जाटी गांव जो की दादा लख्मी का पैतृक गाँव है, में लगभग 8 दिनों तक सांग के दृश्य की शूटिंग की गई। वहीं भिवानी जिले के खरक कला गांव में प्रसिद्ध कुएँ वाला दृश्य फिल्माया गया। पूरी फिल्म की शूटिंग लगभग 60 दिनों में पूर्ण हुई।
फिल्म की शूटिंग RED EPIC कैमरे से की गई, जिसकी सिनेमैटोग्राफी सुप्रतिम भोल ने की। दूसरे शेड्यूल की सिनेमैटोग्राफी विकास शर्मा (SUPVA पासआउट) द्वारा की गई।
वेशभूषा और कला निर्देशन
फिल्म की कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर माला डे थीं। उन्होंने शूटिंग शुरू होने से लगभग एक महीने पहले हरियाणा आकर सभी कलाकारों के लिए नए परिधान तैयार करवाए। नए कपड़ों को पुराना और वास्तविक ग्रामीण स्वरूप देने के लिए उन्हें कॉफी और चाय के घोल में डुबोया गया, जिससे वे वर्षों पुराने और मैले दिखाई दें।
फिल्म का कला निर्देशन जयंत देशमुख और गिरिजा शंकर ने किया। उन्होंने उस समय के हरियाणा के ग्रामीण परिवेश को अत्यंत बारीकी और वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया।
बैलगाड़ी वाला दृश्य
फिल्म का एक महत्वपूर्ण दृश्य बैलगाड़ी का था, जिसमें दादा लखमीचंद बैलगाड़ी से आते हैं। इस दृश्य के लिए वास्तविक पुरानी बैलगाड़ी बड़ी कठिनाई से जींद से मंगाई गई, जबकि दोनों बैल भिवानी के निकट एक गांव से लाए गए। इस दृश्य को वास्तविकता के साथ फिल्माने के लिए पूरी टीम ने विशेष मेहनत की।
संगीत
फिल्म का संगीत उत्तम सिंह ने तैयार किया। इसके गीतों में पंडित लखमीचंद की पारंपरिक रागिनियों को आधुनिक संगीत के साथ अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म की प्रमुख रागिनियाँ और गीत—
बिना अकल बुद्धि बिन माणस
लाख चौरासी
समदर्शी से होए ब्रह्मज्ञानी
कलियुग
गुरु एक विद्या अनेक
सोच समझ के चल मन मूर्ख
रेन सपना
सम्मान और उपलब्धियाँ
फिल्म के गीतों को कई प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज़ दी है, जिनमें रघुवीर यादव, मासूम शर्मा, सोमवीर कथूरवाल, मीनाक्षी पांचाल, श्याम शर्मा, इंदर सिंह लांबा, सुभाष फौजी तथा धर्मेंद्र सांगी निंदाना प्रमुख हैं। इन सभी गायकों ने अपनी विशिष्ट गायकी के माध्यम से पंडित लखमीचंद की रागिनियों और हरियाणवी लोकसंगीत की आत्मा को दर्शकों तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया। 8 नवंबर 2022 को भारत में रिलीज़ हुई। 68वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ हरियाणवी फिल्म (Best Haryanvi Film) का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ।
फिल्म को 108 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित एवं सम्मानित किया गया।
वर्ष 2025 में हरियाणा सरकार द्वारा फिल्म को ₹1 करोड़ की सब्सिडी प्रदान की गई।
हरियाणवी सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर
दादा लख्मी केवल एक जीवनीपरक फिल्म नहीं, बल्कि हरियाणवी लोककला, सांग और रागिनी की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यशपाल शर्मा के निर्देशन, प्रभावशाली अभिनय, गहन शोध, वास्तविक लोकेशन, उत्कृष्ट कला निर्देशन और पारंपरिक संगीत ने इस फिल्म को हरियाणवी सिनेमा की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में स्थान दिलाया। यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए पंडित लखमीचंद के जीवन, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान का एक स्थायी दस्तावेज़ बन चुकी है।
