हरियाणा के शेक्सपीयर कहे जाने वाले पंडित लख्मीचंद सम्मान से विभूषित डॉ. वी.एम. बेचैन : अद्यतन जीवन परिचय
हरियाणवी भाषा और साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर, साहित्यकार, कवि, अनुवादक, पत्रकार, संपादक एवं फिल्म निर्माता डॉ. वी.एम. बेचैन पिछले ढाई दशकों से हरियाणवी बोली एवं साहित्य के उत्थान के लिए निरंतर रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। देशभर की चार दर्जन से अधिक सरकारी, गैर-सरकारी, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा उन्हें विभिन्न साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
हरियाणा साहित्य अकादमी ने वर्ष 2013 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ कृति सम्मान तथा वर्ष 2021 में हरियाणा के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में से एक पंडित लख्मीचंद सम्मान से अलंकृत किया। हरियाणवी साहित्य में उनके योगदान के कारण अनेक साहित्यकार उन्हें “हरियाणा का शेक्सपीयर” भी कहते हैं।
प्रारंभिक जीवन
डॉ. वी.एम. बेचैन का जन्म 7 अगस्त 1976 को हरियाणा के भिवानी में एक साधारण परिवार में हुआ। उनका वास्तविक नाम विनोद मैहरा बेचैन है। उनके स्वर्गीय पिता श्री खुशीराम मैहरा पेशे से मोची थे, जिन्होंने कठिन परिश्रम और संघर्ष के बल पर अपने परिवार का पालन-पोषण किया। डॉ. बेचैन ने पत्रकारिता विषय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की तथा विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर (बिहार) से विद्यावाचस्पति की मानद उपाधि प्राप्त की।
बचपन से ही साहित्य के प्रति उनका विशेष लगाव रहा। हिंदी, उर्दू, हरियाणवी कविता, ग़ज़ल, उपन्यास, हास्य-व्यंग्य और अनुवाद साहित्य में उन्होंने उल्लेखनीय योगदान दिया है।
हरियाणवी साहित्य में प्रयोगधर्मी रचनाकार
डॉ. वी.एम. बेचैन को हरियाणवी साहित्य का प्रयोगधर्मी लेखक माना जाता है। उन्होंने समय-समय पर हरियाणवी भाषा में अनेक नए साहित्यिक प्रयोग किए। वर्ष 2021 में उन्होंने विश्व के प्रसिद्ध अंग्रेज़ी कवियों की चर्चित कविताओं का हरियाणवी अनुवाद किया, जिसके लिए उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में रिकॉर्डधारी के रूप में दर्ज किया गया।
प्रकाशित पुस्तकें
अब तक उनकी निम्नलिखित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं—
- चौपाल मेरे गाँव की (हरियाणवी काव्य संग्रह)
- दश्त-ए-अहसास (उर्दू ग़ज़ल संग्रह)
- कसूत्ता सिंह के कसूत्ते चुटकले
- काच्चे काट रे सां (हरियाणवी काव्य संग्रह)
- फंसो और हंसो (हरियाणवी हास्य-चुटकियाँ)
- शकुंतला अर दुश्यंत (हरियाणवी अनुवाद)
- औरत एक ब्रह्मास्त्र (हिंदी उपन्यास)
- जै… (विश्व साहित्य का हरियाणवी अनुवाद)
- द लीजेंड ऑफ कालापानी – वीर सावरकर (हिंदी नाटक)
- म्हारी गीता, म्हारा ज्ञान (हरियाणवी अनुवाद)
- कई बार लगता है (हिंदी मुक्तछंद कविता संग्रह)
- सुणो छोरियों (हरियाणवी कविता संग्रह)
- मुहब्बत की एफडी (हरियाणवी इश्किया शायरी)
प्रकाशनाधीन पुस्तकें
इनके अतिरिक्त उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशन के लिए तैयार हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- अंधा युग (धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध नाटक का हरियाणवी अनुवाद)
- कोए ऐंडी सै तो रही जागा (हरियाणवी शायरी)
- मेरी नाबालिग ग़ज़लें
- बेचैन की दारूशाला
- काश तुम्हारा नाम गलतफहमी होता
- रोवे ना संतरा
- गडंग (हरियाणवी हास्य-व्यंग्य)
हरियाणवी सिनेमा में योगदान
हरियाणवी सिनेमा को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से डॉ. वी.एम. बेचैन ने “बिन तेरे बेचैन” नामक हरियाणवी फिल्म का निर्माण किया। यह फिल्म 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए नामांकित हुई तथा बाद में कुरुक्षेत्र अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गेस्ट ऑफ ऑनर सम्मान से सम्मानित की गई।
पत्रकारिता एवं संपादन
डॉ. बेचैन ने लगभग सात वर्षों तक आकाशवाणी रोहतक में हरियाणवी कैज़ुअल उद्घोषक के रूप में कार्य किया। वर्ष 2005 में उन्होंने हरियाणा का पहला हरियाणवी समाचार पत्र “लणिहार” प्रारंभ किया, जिसने हरियाणवी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हरियाणवी बोली को संवैधानिक भाषा का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने हरियाणवी रेडियो जंक्शन जैसे सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से देश-विदेश में बसे हरियाणवियों को जोड़ने का प्रयास किया।
उन्होंने बज़्म-ए-शागिर्द, युवा परिवार मासिक पत्रिका तथा लणिहार समाचार पत्र का सफल संपादन एवं संचालन किया। इसके अलावा वेणु वाणी, पहली बार कलम बोली, काँटों की सुगंध, सांझी सोच तथा हरियाणा का गौरव – एक परिचय जैसी पुस्तकों का संपादन भी किया।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्होंने दैनिक हरिभूमि में उप-संपादक तथा दैनिक पंजाब केसरी एवं दैनिक पहली खबर में लंबे समय तक संवाददाता के रूप में कार्य किया।
मंचीय और नाट्य योगदान
देशभर में वे 300 से अधिक कवि सम्मेलनों एवं साहित्यिक मंचों पर अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं। हरियाणवी हास्य शैली में ग़ज़लों की प्रस्तुति को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है। हाल के वर्षों में उन्होंने “द लीजेंड ऑफ कालापानी – वीर सावरकर” पर दो नाटकों की रचना की, जिनका विमोचन तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा किया गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने “दास्तान-ए-रोहणात” नाटक के सभी गीतों का लेखन किया, जिसके लिए उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित भी किया गया।
साहित्यिक विरासत
डॉ. वी.एम. बेचैन का साहित्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हरियाणवी समाज, संस्कृति, लोकजीवन, हास्य, संवेदना और विश्व साहित्य को हरियाणवी भाषा में जोड़ने का एक महत्वपूर्ण सेतु है। कवि, पत्रकार, अनुवादक, संपादक, रंगकर्मी और फिल्म निर्माता के रूप में उनका बहुआयामी योगदान हरियाणवी भाषा एवं साहित्य की समृद्धि में एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।
