मोमाकू (मोटर, माचिस और कटर)
कैंप वनवास के बाद कुलदीप कुनाल का सबसे अच्छा काम लगा मोमाकू। यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म Kable One पर रिलीज हुई है और हरियाणवी भाषा में बनी है। कैंप वनवास, जो करीब 6 साल पहले आई थी, उसके बाद लगा था कि कुलदीप कुनाल इंडस्ट्री में काम नहीं कर रहे हैं। हरियाणा की पहली वेब सीरीज़ कैंप वनवास थी।यह सीरीज़ तकनीकी रूप से काफी कमजोर थी, जिसका स्क्रीनप्ले भी स्पष्ट नहीं था कि आखिर किस दिशा में जा रहा है। लेकिन कुलदीप कुनाल ने मोमाकू का स्क्रीनप्ले लिखकर इस साल की सबसे मजबूत हरियाणवी फिल्मों में से एक फिल्म दे दी है।मोमाकू (मोटर, माचिस और कटर) – फिल्म का स्क्रीनप्ले कुलदीप कुनाल ने बेहद कसावट के साथ लिखा है। इतना मजबूत कि फिल्म से ध्यान हटता ही नहीं। फिल्म में बहुत कम लोकेशन का इस्तेमाल किया गया है। एक गाँव का जोहड़, वहाँ हो रहा जागरण और खेत का कमरा, इन्हीं जगहों पर फिल्म के लगभग 80 प्रतिशत दृश्य फिल्माए गए हैं। स्क्रीनप्ले के मामले में कुलदीप कुनाल ने बहुत अच्छा काम किया है। अंत में दिखाई गई मार्मिकता भी बेहतरीन है।
कहानी
तीन आर्थिक तंगी से जूझ रहे आदमी एक ATM मशीन चुरा लेते हैं और उसे खेतों के बीच एक ट्यूबवेल के कमरे में छिपा देते हैं। उनका इरादा ATM तोड़कर पैसे निकालने का होता है, लेकिन रात बढ़ने के साथ-साथ उनके बीच शक, लालच, डर और आपसी अविश्वास बढ़ने लगता है। ATM खोलने की कोशिशें नाकाम होती हैं और हालात धीरे-धीरे अराजक और हास्यास्पद बन जाते हैं। अंत में उनकी लालच और हड़बड़ी उन्हें ऐसे परिणाम तक ले जाती है जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होती।
फिल्म की डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी एकदम प्रोफेशनल लगी। गाँव, जागरण और जोहड़ के दूर से लिए गए वाइड एंगल शॉट्स तकनीकी रूप से काफी मजबूत बनाए गए हैं।
खेत के कमरे जैसी सीमित जगह में भी हर दृश्य में जान डाली गई है। एक प्रोफेशनल DOP की पहचान यही होती है कि वह कम लोकेशन में भी दृश्यों को प्रभावशाली बना सके। डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी का काम कमाल का लगा। कई जगह ड्रोन फोटोग्राफी भी बेहतरीन है। शोएब सिद्दीकी और ज़ोहन सिद्दीकी ने DOP के रूप में शानदार काम किया है।
फिल्म एडिटिंग के मामले में भी काफी मजबूत है।
जागरण, खेत और जागरण के गीतों के दौरान जो एडिटिंग ट्रांज़िशन इस्तेमाल किए गए हैं, उन्हें काफी ध्यान से तैयार किया गया है। फिल्म की DI भी बहुत सुंदर है, जो फिल्म को और अधिक मजबूत बनाती है।
कास्टिंग
जतिन Sarna , तुषार दत्त, गौरव शर्मा, अपूर्वा अरोड़ा, यशपाल शर्मा, सोनू रोंझिया, श्रीकांत वर्मा और बलजिंदर कौर।
कास्टिंग के मामले में फिल्म कहीं भी कमजोर नहीं लगती। यशपाल शर्मा की अभिनय क्षमता हमेशा की तरह शानदार है। कास्ट में शामिल हर कलाकार ने अच्छा काम किया है। मुकेश मुसाफिर और सतीश कश्यप की एक्टिंग भी काफी अच्छी लगी।
आर्ट
आर्ट डायरेक्टर सनी मैसन का काम अच्छा है। खेत के कमरे का सेट और वहाँ रखी गई चीजें बहुत कुछ बयां करती हैं। वहीं जागरण का सेट भी बिल्कुल स्वाभाविक लगता है। कहीं भी कृत्रिम या ओवर नहीं लगता।
साउंड डिज़ाइन
साउंड डिज़ाइनर ने छोटी-छोटी चीजों पर भी बारीकी से काम किया है। ATM मशीन को जब आयशर ट्रैक्टर में ले जाया जाता है, वहाँ उसका साउंड और अन्य कई जगहों पर साउंड डिज़ाइनअच्छा लगा।आयुष बहल और फॉली वर्क में हिमांशु शेखर ने अच्छा काम किया है। साउंड डिज़ाइनिंग बहुत सुंदर है। जागरण में चल रहे गीत और खेत के कमरे के दृश्यों के बीच साउंड कहीं भी असंतुलित नहीं लगता। किसी भी जगह साउंड ओवर नहीं लगता। Satender Sehrawat इससे पहले कैंप वनवास को प्रोड्यूस कर चुके हैं, जो हरियाणा की एक कमजोर वेब सीरीज़ थी। लेकिन 6 साल पहले इस तरह का जोखिम लेना अपने आप में बड़ी बात थी।फिल्म की सबसे अच्छी चीज़ इसकी लाइटिंग लगी। हर दृश्य में प्रकाश व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया है। जागरण की रोशनी से लेकर खेत के दृश्यों तक, हर जगह लाइटिंग प्रभावशाली है।जागरण में चल रहे गीतों की सबसे अच्छी बात यह लगी कि वे परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहते हैं। अलग-अलग गायक जो भजन गा रहे हैं, सभी अच्छे लगे। सोमवीर Kathurwal द्वारा गाया गया गीत बहुत सुंदर है।
मोमाकू (मोटर, माचिस और कटर) बनाकर बजट की कई सीमाएँ पार की गई हैं। अच्छा पैसा लगाया गया है और अच्छा सिनेमा बनाकर यह साबित किया गया है कि हरियाणा में भी इस तरह की फिल्में बन सकती हैं।पिछले 5 वर्षों में आई हरियाणवी फिल्मों की बात करूँ तो मोमाकू सबसे तकनीकी रूप से मजबूत फिल्मों में से एक लगी। कुलदीप कुनाल ने निर्देशन और स्क्रीनप्ले जिस स्तर का किया है, उससे साफ दिखाई देता है कि टीम ने काफी पेपरवर्क किया है। ऐसा लगता है कि फिल्म कैमरे से पहले कागज़ पर पूरी तरह तैयार की गई थी।अच्छी फिल्म है, तकनीकी रूप से मजबूत फिल्म है।
हालाँकि यह भी काफी हद तक OTT प्लेटफॉर्म kable One पर निर्भर करेगा कि वह इस फिल्म का प्रचार-प्रसार किस तरह करता है। कंटेंट अच्छा बनाया गया है। एक जगह बलजिंदर कौर के बेटे की बहू को अस्पताल में लड़की होने वाला दृश्य थोड़ा ओवर लगा, लेकिन इसके अलावा फिल्म तकनीकी रूप से काफी मजबूत बनी है।
मोमाकू फिल्म की हर चीज़ बेहतरीन है। अगर आप इसे देखने बैठ जाएँ, तो बीच में पलक झपकाने का भी मन नहीं करेगा। यह फिल्म शुरुआत से अंत तक दर्शकों को बाँधे रखती है।
