अभिषेक पंडित : संगीत और साउंड इंजीनियरिंग की प्रेरणादायक यात्रा
अभिषेक पंडित भारतीय संगीत जगत के एक प्रतिष्ठित BGM (Background Music) निर्माता, संगीतकार और साउंड इंजीनियर हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश में हुई तथा उन्होंने उत्तर प्रदेश बोर्ड से 10वीं कक्षा उत्तीर्ण की। बाद में संगीत की विभिन्न शैलियों को सीखने और समझने के उद्देश्य से वे राजस्थान चले गए, जहाँ उन्होंने राजस्थान बोर्ड से 12वीं कक्षा पूरी की।
बचपन से ही अभिषेक की रुचि संगीत में थी। वे पाँचवीं कक्षा से तबला बजाने लगे थे। उनके परिवार का संगीत से कोई संबंध नहीं था और माता-पिता चाहते थे कि वे एक इंजीनियर बनें। हालांकि अभिषेक ने अपने जुनून का अनुसरण किया और संगीत को ही अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। पढ़ाई में भी वे अच्छे थे, विशेष रूप से गणित और भौतिकी उनके पसंदीदा विषय रहे। उन्होंने स्नातक शिक्षा में 79 प्रतिशत अंकों के साथ सफलता प्राप्त की।
12वीं के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में MCA में प्रवेश लिया। इसी दौरान उन्होंने कीबोर्ड बजाना शुरू किया और विभिन्न मंचीय कार्यक्रमों में भाग लेने लगे। छत्तीसगढ़ की समृद्ध और पुरानी संगीत परंपरा से जुड़कर उन्होंने वहाँ की संगीत इंडस्ट्री में एक कीबोर्ड प्लेयर के रूप में कार्य किया तथा अनेक गीतों की रिकॉर्डिंग में योगदान दिया।अभिषेक पंडित महान संगीतकार एवं गायक रवीन्द्र जैन को अपना आदर्श और गुरु मानते हैं। वहीं उनके व्यक्तिगत गुरु श्याम सारथी रहे, जो छत्तीसगढ़ फिल्म उद्योग में संगीत निर्देशक के रूप में कार्यरत थे। इसके अतिरिक्त उन्होंने रुपेंद्र श्रीधर से भी संगीत की गहन शिक्षा प्राप्त की। उपेन्द्र श्रीधर प्रसिद्ध संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के साथ गिटार वादन कर चुके थे। इन गुरुओं से अभिषेक ने BGM निर्माण, म्यूजिक स्कोरिंग और इंस्ट्रूमेंट अरेंजमेंट की बारीकियाँ सीखीं।अपने गुरु श्याम सारथी के मार्गदर्शन में अभिषेक ओडिशा चले गए ताकि वे एक नए राज्य के संगीत और संस्कृति को समझ सकें। उन्होंने लगभग दो वर्षों तक ओड़िया संगीत उद्योग में कार्य किया और अनेक फिल्मों के लिए ट्रैक तथा संगीत तैयार किए। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि केवल संगीत निर्माण ही पर्याप्त नहीं है; तकनीकी ज्ञान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2003 से वे पेशेवर रूप से संगीत क्षेत्र में सक्रिय हैं। कंप्यूटर और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए उन्होंने साउंड इंजीनियरिंग सीखने का निर्णय लिया और इसके लिए चेन्नई का रुख किया। वहाँ उन्होंने टी. एन. दास के सहायक के रूप में कार्य किया। उनके साथ काम करते हुए उन्होंने रिकॉर्डिंग, मिक्सिंग, साउंड डिज़ाइन, ऑडियो फ्रीक्वेंसी और आधुनिक स्टूडियो तकनीकों का गहन ज्ञान प्राप्त किया। लगभग दो वर्षों तक उन्होंने इस क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया।
इसके बाद उन्होंने पेशेवर करियर की शुरुआत की। उनकी पहली नौकरी गोरखपुर के एक म्यूजिक स्टूडियो में लगी, जहाँ उन्होंने लगभग छह महीने तक कार्य किया। इसके पश्चात वे दिल्ली चले गए और वहाँ भी संगीत एवं ऑडियो क्षेत्र में कार्य किया। कुछ समय बाद वे मुंबई पहुँच गए, जहाँ उन्हें एक प्रतिष्ठित ऑडियो कंपनी में कार्य करने का अवसर मिला। मुंबई में उन्होंने साउंड इंजीनियरिंग संस्थानों में अध्यापन भी किया और अनेक फिल्मों की ऑडियो एवं बैकग्राउंड म्यूजिक परियोजनाओं में योगदान दिया।
अपने करियर के दौरान अभिषेक पंडित ने हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी सहित विभिन्न भाषाओं की फिल्मों में BGM और साउंड डिज़ाइन का कार्य किया है। उनकी बहुआयामी प्रतिभा और विभिन्न राज्यों की संगीत परंपराओं को सीखने की ललक ने उन्हें भारतीय संगीत उद्योग में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
वर्ष 2014 में किसी कार्यवश वे अपने गृह नगर अलीगढ़ आए, जहाँ उन्होंने अपने अब तक के संघर्ष, अनुभव और उपलब्धियों पर विचार किया। उनकी जीवन यात्रा इस बात का उदाहरण है कि समर्पण, निरंतर सीखने की इच्छा और कठिन परिश्रम के बल पर किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त की जा सकती है। करियर के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर अभिषेक पंडित को उनके मेरठ निवासी एक मित्र का फोन आया। वह मित्र रोहतक में कार्यरत था और उसने बताया कि एक फिल्म का निर्माण हो रहा है, जिसकी निर्माता प्रसिद्ध अभिनेत्री हेमा मालिनी थीं। फिल्म के निर्देशक रोहतक के सिविल अस्पताल में कार्यरत थे। मित्र ने अभिषेक से निर्देशक से मुलाकात करने का आग्रह किया।
मुलाकात के दौरान निर्देशक ने पूछा कि फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM) तैयार करने में कितना समय लगेगा। अभिषेक ने आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया कि वे 7 से 8 दिनों में पूरा BGM तैयार कर सकते हैं। इसके बाद वे रोहतक पहुँचे और स्टूडियो का निरीक्षण किया ताकि अगले दिन से काम शुरू किया जा सके।
अगले दिन जब वे स्टूडियो पहुँचे, तो वहाँ एक अत्यंत प्रतिभाशाली और आकर्षक युवती बैठी थीं। उनका नाम कविता सोभू था। पहली ही मुलाकात में अभिषेक को महसूस हुआ कि वे जीवनभर उनका साथ चाहते हैं। उन्होंने अपने मन की बात सीधे कविता जी से कह दी कि वे उनसे विवाह करना चाहते हैं। हरियाणा में कविता सोभू का नाम संगीत जगत में सम्मान के साथ लिया जाता है। वे एक प्रतिष्ठित शास्त्रीय गायिका हैं और संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं।
वर्ष 2016 में अभिषेक पंडित और कविता सोभू का विवाह हुआ। कविता सोभू चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय में संगीत विषय की प्रोफेसर हैं तथा पूर्णतः शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित गायिका हैं। विवाह के बाद अभिषेक कुछ समय के लिए मुंबई चले गए, जबकि कविता उस समय महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर रही थीं।
नोटबंदी के बाद दोनों पुनः हरियाणा लौट आए। हरियाणा में अभिषेक ने संगीत और स्टूडियो तकनीक से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कई स्टूडियो संचालकों और संगीत निर्माताओं को आधुनिक रिकॉर्डिंग, मिक्सिंग और ऑडियो तकनीकों की जानकारी दी। विशेष रूप से उन्होंने TR Music को मिक्सिंग संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया, जिसके लिए उन्हें औपचारिक रूप से नियुक्त भी किया गया था। इसके अलावा GR Studio सहित कई स्टूडियो में VST सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन और तकनीकी सेटअप का कार्य भी किया।हालाँकि उस समय तक हरियाणा फिल्म उद्योग में उन्हें बड़े स्तर पर काम नहीं मिला था। इसी दौरान डॉ. जगबीर राठी एक नई फिल्म “दिल हो गया लापता” का निर्माण कर रहे थे, जो हिंदी और हरियाणवी भाषा का मिश्रित प्रोजेक्ट था। इस फिल्म के लिए अभिषेक को BGM तैयार करने का अवसर मिला, जो हरियाणा फिल्म उद्योग में उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ।इसके बाद जिंद के प्रसिद्ध निर्देशक शिवराज गोयत ने अपनी फिल्म “चौधर 2” के लिए अभिषेक को आमंत्रित किया। इस परियोजना में उन्होंने न केवल बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया, बल्कि फिल्म का संगीत निर्देशन भी संभाला।
सफलताओं का यह सिलसिला आगे बढ़ता गया और उन्हें वेब सीरीज़ “सेफ हाउस 2” के लिए BGM तैयार करने का अवसर मिला। इसी परियोजना के दौरान उनकी मुलाकात चिराग भसीन से हुई, जिनके माध्यम से उन्हें फिल्म “छापा ” (BGM) में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। इसके बाद अभिषेक ने रामकेश जीवनपुरा की फिल्म के लिए ऑडियो मिक्सिंग का कार्य किया। आगे चलकर उन्होंने “घूंघट” फिल्म के लिए स्टेज और बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया तथा “कच्छाधारी” जैसी फिल्मों में भी BGM निर्माण कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। हरियाणा फिल्म उद्योग में अपनी पहचान मजबूत करने के बाद अभिषेक पंडित को लगातार नई परियोजनाएँ मिलने लगीं। उन्होंने नीरज रिधानियाकी फिल्म “15 दिन” का बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार किया, जिसे Sonotek Music पर रिलीज़ किया गया। इस प्रोजेक्ट ने उनके कार्य को और अधिक पहचान दिलाई।
अब तक अभिषेक पंडित हरियाणा फिल्म उद्योग में लगभग 18 फिल्मों और वेब सीरीज़ के लिए संगीत एवं बैकग्राउंड म्यूजिक तैयार कर चुके हैं।
संघर्ष के दिन
अभिषेक पंडित की सफलता के पीछे वर्षों का कठिन संघर्ष छिपा है। जब वे संगीत और साउंड इंजीनियरिंग सीखने के लिए चेन्नई गए, तब उनके पिता इस निर्णय के पक्ष में नहीं थे और उन्हें अपेक्षित पारिवारिक सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने अपने सपनों का पीछा नहीं छोड़ा।
दिल्ली से चेन्नई जाने के दौरान उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। जीवनयापन के लिए उन्होंने अनेक छोटे-बड़े कार्य किए। दिल्ली में वे एक बैंड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ तालवाद्य बजाकर आय अर्जित करते थे। चेन्नई में उन्होंने Park Hotel Chennai में डीजे के रूप में भी कार्य किया, ताकि अपने संगीत प्रशिक्षण और दैनिक खर्चों को जारी रख सकें।
दिल्ली में पहला बड़ा अवसर
जब अभिषेक पहली बार दिल्ली आए, तब उनके पास संगीत उद्योग में कोई मजबूत पहचान नहीं थी। वे नियमित रूप से दरीयागंज और संगीत वाद्ययंत्रों की दुकानों के आसपास जाते थे, जहाँ संगीतकारों और संगीत निर्देशकों का आना-जाना लगा रहता था। वहाँ से वे विभिन्न संगीत निर्देशकों के संपर्क नंबर एकत्र करते और उनसे मिलने का प्रयास करते।
इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रसिद्ध संगीत निर्देशक गोविंद प्रसाद सती से हुई। गोविंद सरस्वती ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें दो गीतों पर काम करने का अवसर दिया। अभिषेक ने यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया, जिससे प्रभावित होकर गोविंद जी ने उन्हें 10,000 रुपये का पारिश्रमिक दिया।
अगले ही दिन गोविंद प्रसाद सती का फोन आया और उन्होंने अभिषेक को अपना सहायक बनने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने पूछा कि वे मासिक वेतन के रूप में कितना पारिश्रमिक लेना चाहेंगे। यह अभिषेक के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। गोविंद प्रसाद सती, हरियाणवी फिल्म “धाकड़ छोरा 2” के संगीत निर्देशक भी रहे हैं। उनके साथ काम करते हुए अभिषेक ने संगीत निर्देशन, धुन निर्माण, ऑर्केस्ट्रेशन और फिल्म संगीत की अनेक बारीकियाँ सीखीं।
आगामी परियोजनाएँ
अभिषेक पंडित वर्तमान में कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इनमें “कॉलेज डेज़” का बैकग्राउंड म्यूजिक, चिराग भसीन की फिल्म “कर्मा”, एक शॉर्ट फिल्म तथा एक बाली-आधारित फिल्म परियोजना शामिल हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स में वे BGM, साउंड डिज़ाइन और ऑडियो पोस्ट-प्रोडक्शन का कार्य संभाल रहे हैं।
आज अभिषेक पंडित की पहचान केवल एक BGM निर्माता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे संगीतकार और साउंड इंजीनियर के रूप में है जिन्होंने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु, दिल्ली, मुंबई और हरियाणा की संगीत परंपराओं को सीखकर अपने अनुभव को भारतीय सिनेमा की सेवा में लगाया है। उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि लगन, निरंतर सीखने की इच्छा और अथक परिश्रम किसी भी सपने को साकार कर सकते हैं। अभिषेक पंडित उन चुनिंदा संगीतकारों में से हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा, तकनीकी दक्षता और अथक परिश्रम के बल पर भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में विशेष पहचान बनाई है। उत्तर प्रदेश के एक साधारण परिवार से निकलकर विभिन्न राज्यों की संगीत परंपराओं को आत्मसात करते हुए उन्होंने स्वयं को एक सफल BGM निर्माता, साउंड इंजीनियर और संगीत संयोजक के रूप में स्थापित किया है। उनका जीवन संगीत के प्रति समर्पण, निरंतर सीखने की इच्छा और संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी है।
