ओपरी हवा

हरियाणा प्रदेश की पहली हॉरर वेबसीरीज़ “ओपरी हवा”

 इसके निर्देशक रणजीत चौहान हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह रही कि इस सीरीज़ को हरियाणा में बहुत कम लोगों ने देखा। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि “ओपरी हवा” की शूटिंग के तुरंत बाद “ओपरी पराई” नाम का दूसरा प्रोजेक्ट भी शूट किया गया, जिसकी फीमेल लीड अंजवी सिंह हुड्डा ही थीं।

लेकिन “ओपरी पराई” का निर्देशन किसी और निर्देशक ने किया था।
कंसेप्ट की बात करें तो “ओपरी हवा” और “ओपरी पराई” दोनों के टाइटल इतने मिलते-जुलते थे कि ऑडियंस समझ ही नहीं पाई कि कौन-सा प्रोजेक्ट अलग है और कौन-सा ज्यादा बेहतर। यही इस सीरीज़ के कम चर्चित रहने का एक बड़ा कारण बना। दरअसल “ओपरी हवा” का पहला नाम “पहरा” था। स्क्रिप्ट राइटिंग के दौरान  मनोज राठी और रणजीत चौहान ने ऑफिस लेकर बैठकर यह तय किया था कि एक ऐसी सीरीज़ बनाई जाए जिसका अलग ही चल हो। फिर डिस्कशन हुआ कि ऑनर किलिंग जैसे विषय पर काम किया जाए, लेकिन उसे सीधे-सीधे न दिखाकर इस तरह प्रस्तुत किया जाए कि ऑडियंस आख़िर तक असली सच समझ ही न पाए।

मुख्य किरदार के लिए हरिओम कौशिक पर बहुत बारीकी से काम किया गया। उनकी बॉडी लैंग्वेज, फेस एक्सप्रेशन और स्क्रीन प्रेज़ेंस को लेकर निर्देशक ने पहले से तैयारी करवाई। उन्हें खासतौर पर बताया गया कि किरदार की बॉडी लगभग स्टिल रहेगी और चेहरे के भाव बेहद शांत रहेंगे। क्योंकि “ओपरी हवा” में ज़रा भी ओवरएक्टिंग पूरे माहौल को खराब कर सकती थी, इसलिए निर्देशक रणजीत चौहान ने हरिओम कौशिक से बहुत नियंत्रित अभिनय करवाया।

सीरीज़ में हरिओम जिस कमरे में रहता है, वह असल में ऊपर का कमरा था, लेकिन उसे स्क्रीन पर इस तरह फिल्माया गया कि ऑडियंस को यह एहसास ही नहीं हो पाए। पूरी शूटिंग में इस बात का खास ध्यान रखा गया कि कहीं भी कंटिन्यूटी ब्रेक महसूस न हो।

फिल्म में हॉरर इफेक्ट के लिए बिजली कड़कने वाले कुछ सीन बनाए गए थे। इसके लिए वेल्डिंग का काम करने वालों को बुलाया गया और वहीं लाइव इफेक्ट तैयार करके बिजली कड़कने वाले सीन फिल्माए गए।

जब यह सीरीज़ Stage पर रिलीज़ हुई, तब इसका नाम “पहरा” से बदलकर “ओपरी हवा” रखा गया। लेकिन बाद में महसूस हुआ कि नाम बदलना शायद गलत फैसला था।

ओपरी हवा” लगभग 25 लाख के बजट में बनी थी और इसकी शूटिंग करीब 22 दिनों में पूरी हुई। फिल्म का कॉन्सेप्ट मनोज राठी का था। इसकी शूटिंग मुख्य रूप से नौनंद गांव (सांपला के पास) में हुई, जबकि कुछ शॉट्स रोहतक, हरिद्वार और गोगामेड़ी में भी फिल्माए गए।

तकनीकी रूप से “ओपरी हवा” हरियाणा की बेहद मजबूत वेबसीरीज़ थी। सिनेमैटोग्राफर विकास शर्मा ने हर एक फ्रेम पर शानदार काम किया था। सीरीज़ हॉरर थी, लेकिन स्क्रीन पर भूत कहीं दिखाई नहीं देता। निर्देशक रणजीत चौहान का विज़न ही ऐसा था कि डर माहौल और एहसास से पैदा हो। फिर भी साउंड डिज़ाइन और अंजवी सिंह हुड्डा का होंठों के नीचे धीरे-धीरे दांत दबाना यह एहसास दिला देता था कि इस घर में कुछ अनहोनी हुई है।

एक और खास बात यह थी कि “ओपरी हवा” ऑनर किलिंग पर आधारित थी, लेकिन इसका स्क्रीनप्ले कुछ इस तरह लिखा गया था कि ऑडियंस आख़िर तक असली सच समझ नहीं पाती। फिल्म का साउंड डिज़ाइन नीरज रोहिला ने किया था। साउंड के जरिए ऐसा माहौल बनाया गया कि हर सीन में डर और सस्पेंस महसूस होता था।

शुरुआत में निर्देशक रणजीत चौहान ने मुख्य भूमिका के लिए मुकेश मुसाफिर को फाइनल किया था। लेकिन उसी दौरान मुकेश मुसाफिर को किसी दूसरे प्रोजेक्ट के सिलसिले में शूट के लिए लंदन जाना पड़ा। इसके बाद अचानक निर्देशक ने हरिओम कौशिक को फाइनल किया। हालांकि हरिओम कौशिक ने अपने अभिनय से किरदार को बहुत शानदार तरीके से निभाया। फिल्म का BGM भी धीरे-धीरे कहानी के असली सस्पेंस की तरफ इशारा करता रहता है।

फिल्म की शूटिंग के दौरान सांपला के आसपास के गांवों में लगातार बारिश हो रही थी। शूट रुकने की स्थिति बन गई थी और तीन सीन बाकी थे। लेकिन DOP विकास शर्मा ने रणजीत चौहान से कहा कि शूट नहीं रुकने देंगे। तब उन्होंने एक सीन में सुरेन सरकार के हाथ में छाता दे दिया, जब वह बीमार मनोज राठी से मिलने आता है।

मतलब आप सोच सकते हैं कि किस तरह बारिश जैसी परेशानी के बावजूद उसी माहौल के अनुसार सीन शूट किए गए ताकि शूट अगले दिन पर न जाए और लागत भी न बढ़े।गीत “अहम का पिंजरा टूटेगा” एक गहरी चेतावनी और आत्मचिंतन से भरा हुआ गीत लगता है। इसके शब्द इंसान के अहंकार, सत्ता, लालच और समय की सच्चाई को सामने लाते हैं।
जिस तरह आपने बताया कि इसे आकाश चावरिया ने लिखा है, उससे यह साफ है कि लेखक ने केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज और इंसान के भीतर छिपे अहम् पर प्रहार करने की कोशिश की है। यही वजह है कि मैं अक्सर कहता हूं कि रोहतक में फिल्म बनाने वालों की एक अलग लॉबी है, और उनमें रणजीत चौहान जैसे निर्देशक शामिल हैं, जिन्होंने “ओपरी हवा” बनाकर हरियाणा को उसकी पहली हॉरर वेबसीरीज़ दी।

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