सांगी

इसी लोक कला और कलाकारों के संघर्ष को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म सांगी एक सार्थक प्रयास है।

रिव्यू: सांगी

हरियाणवी संस्कृति में सांग और रागनी का एक विशेष स्थान है। बिना इनके हरियाणवी लोक जीवन अधूरा-सा लगता है। इसी लोक कला और कलाकारों के संघर्ष को केंद्र में रखकर बनाई गई फिल्म सांगी एक सार्थक प्रयास है। यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं करती, बल्कि समाज की उस सोच को भी सामने लाती है जहाँ कलाकार को सम्मान से अधिक ताने सुनने पड़ते हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी अमन नाम के एक युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो सांग में महिला वेश धारण कर नृत्य करता है। उसकी माँ चाहती थी कि वह एक अच्छा कलाकार बने, लेकिन उसके पिता की सोच इसके बिल्कुल विपरीत है। उनके अनुसार सांग करने वालों की समाज में कोई इज्जत नहीं होती।

अमन को परिवार, समाज और अपनी पहचान से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। संघर्षों के बीच वह अपनी कला और आत्मसम्मान दोनों को बचाने की कोशिश करता है। फिल्म कलाकारों के मानसिक दबाव और समाज की सोच को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करती है।

अभिनय और कास्टिंग

फिल्म की कास्टिंग काफी हद तक प्रभावशाली है।

  • अमन के किरदार में रोहित बच्ची पूरी फिल्म में दर्शकों को बांधे रखते हैं। उनके डांस और फेस एक्सप्रेशन प्रभावशाली हैं।
  • सुमन के रोल में साक्षी दलाल से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती थी। कई जगह उनके एक्सप्रेशन कमजोर लगते हैं।
  • गीतू परी ने अपने किरदार को अच्छी तरह समझकर निभाया है।
  • अमन के पिता के रूप में इंदर सिंह लांबा प्रभाव छोड़ते हैं।
  • नानू के रोल में रमेश मूर्ति ने शानदार अभिनय किया है।
  • कुलदीप सांगी के किरदार में लोकेश मोहन अच्छा काम करते हैं।
  • रणदीप हुड्डा की माता आशा हुड्डा का यह पहला कैमरा फेस था और उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया।
  • चंगा के रोल में हनिफ भाटी कम समय में भी अपनी छाप छोड़ते हैं।
  • विलेन दिलावर के रूप में अमित चौहान ने शानदार अभिनय किया है।

हालांकि, 8:09 मिनट पर बाल कलाकार अमन (प्रियांशु बाजवान) बार-बार इधर-उधर देखते नजर आते हैं। इस पर डायरेक्टर और डीओपी को ध्यान देना चाहिए था।

सिनेमैटोग्राफी (DOP)

फिल्म के डीओपी अभिषेक सेनी हैं। कई जगह कैमरा वर्क अच्छा है, लेकिन कुछ शॉट्स में और सुधार की गुंजाइश नजर आती है।

फिल्म में Wide Shot, Extreme Wide Shot, Long Shot और Close-Up का अच्छा इस्तेमाल किया गया है, लेकिन कुछ क्लोज़-अप भावनाओं को पूरी गहराई से पकड़ नहीं पाते।

पिंडारा वाला सीन, जहाँ अमन अपनी माँ की अस्थियां प्रवाहित करने आता है, भावनात्मक तो है लेकिन उसे ड्रोन शॉट या बोट एंगल से और ज्यादा सिनेमैटिक बनाया जा सकता था।

आर्ट डायरेक्शन

विशाल ठाकुर का आर्ट डायरेक्शन संतोषजनक है। कुछ जगह सेट डिजाइन और माहौल अच्छा लगता है, खासकर अंतिम फाइट सीन में। हालांकि, थोड़ी और क्रिएटिविटी फिल्म को विजुअली ज्यादा मजबूत बना सकती थी।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म का संगीत काफी अच्छा है। गीतकारों ने लोक संस्कृति की भावना को खूबसूरती से प्रस्तुत किया है।

संगीत आरके क्रू द्वारा दिया गया है, जो हरियाणा में बेहतरीन म्यूजिक के लिए जाना जाता है।

गायकों में:

  • कमल पेगा
  • हिमांशु अनुपम
  • आसू ट्विंकल
  • नोनू राणा
  • अनु हरियाणवी

ने शानदार गायकी की है।

“जीवन देखा मकड़ी का” गाना फिल्म में सही जगह पर फिट बैठता है। हालांकि “चलया भी ना जाता” रागिनी में केवल एक अंतरा होने के कारण गाना थोड़ा अधूरा महसूस होता है।

फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी प्रभावशाली है और भावनात्मक दृश्यों को मजबूती देता है।

एडिटिंग, DI और VFX

फिल्म की एडिटिंग Sosrg Studio द्वारा की गई है। एडिटिंग ठीक है, लेकिन फिल्म की लंबाई थोड़ी कम की जा सकती थी।

पेसिंग

  • शुरुआत और मिड पार्ट अच्छा है
  • क्लाइमैक्स के पास फिल्म धीमी हो जाती है

DI का काम संतोषजनक है, हालांकि कुछ सीन में और बेहतर कलर ग्रेडिंग की जा सकती थी।

VFX बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन जहाँ इस्तेमाल हुआ है वहाँ ठीक लगता है।

तकनीकी कमियाँ

फिल्म टेक्निकली ठीक है, लेकिन कुछ छोटी कमियाँ ध्यान खींचती हैं:

  • कुछ इमोशनल सीन उतने प्रभावशाली नहीं बन पाए
  • “चलया भी ना जाता” जैसी मर्मिक रागिनी पर विजुअल इम्पैक्ट कमजोर लगता है
  • अमन की माँ की मृत्यु के बाद उसका मुंडन न होना एक बड़ी कंटिन्युटी मिस है
  • फिल्म का टाइटल सांगी होने के बावजूद “पक्का साज” जैसी मुख्य रागिनी का न होना खलता है

निष्कर्ष

सांगी हरियाणवी लोक कला, सांग और कलाकारों के संघर्ष को ईमानदारी से दिखाने की कोशिश करती है। फिल्म की राइटिंग, संवाद, संगीत और कुछ कलाकारों का अभिनय इसकी सबसे बड़ी ताकत हैं।

हालांकि लंबाई, पेसिंग और कुछ तकनीकी कमियाँ फिल्म को पूरी तरह उत्कृष्ट बनने से रोकती हैं। फिर भी यह फिल्म हरियाणवी संस्कृति और लोक कलाकारों की दुनिया को समझने के लिए जरूर देखी जानी चाहिए।

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