श्री महावीर सिंह गुड्डू हरियाणा के जाने-माने लोक कलाकार
परिचय
श्री महावीर सिंह गुड्डू हरियाणा के जाने-माने लोक कलाकार हैं, जिन्होंने पिछले लगभग 50 वर्षों से हरियाणवी लोक संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे विशेष रूप से अपने प्रसिद्ध शिव भजन “बम लहरी” के लिए पहचाने जाते हैं।
प्रारंभिक जीवन और करिय
उनका जन्म 10 अक्टूबर 1961 को हरियाणा के जींद जिले के गांगोली गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें कला के प्रति गहरा लगाव था, जिसके चलते उन्होंने मात्र 11 वर्ष की उम्र में मंच पर प्रस्तुति देना शुरू कर दिया। उनका “सपेरा” समूह नृत्य काफी लोकप्रिय हुआ। वर्ष 1980 में उन्होंने अंतर विश्वविद्यालय युवा महोत्सव में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
उपलब्धियाँ और पहचान
महावीर सिंह गुड्डू ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरियाणवी संस्कृति का प्रतिनिधित्व किया। दिल्ली में आयोजित कई बड़े कार्यक्रमों और युवा महोत्सवों में उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। वे हरियाणा के उन पहले कलाकारों में से हैं, जिन्होंने पुरुष होते हुए भी पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य प्रस्तुत कर एक नई पहचान बनाई।
कला में योगदान
उन्होंने हरियाणवी लोक नृत्य और नाटक को नई दिशा और पहचान दी। “घोड़ा नाच” जैसी पारंपरिक कला को पुनर्जीवित करने में उनका विशेष योगदान रहा है। पिछले 35 वर्षों से वे आकाशवाणी, रोहतक से जुड़े हुए हैं और एक उत्कृष्ट लोक गायक व रंगमंच कलाकार के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
सामाजिक योगदान
महावीर सिंह गुड्डू ने अपनी कला का उपयोग समाज में जागरूकता फैलाने के लिए भी किया। उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, नशा मुक्ति और अन्य सामाजिक मुद्दों पर कई गीत प्रस्तुत किए। उनके इस योगदान के लिए हरियाणा पुलिस द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया।
सम्मान और पुरस्कार
उनकी कला साधना के लिए उन्हें “पंडित लखमीचंद पुरस्कार” और “हरियाणा कला रत्न सम्मान” जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। वर्ष 2016 में उन्हें लंदन में सम्मान मिला और 2022 में अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। इसके अलावा, उन्हें 2024 में पद्मश्री (भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
निष्कर्ष
श्री महावीर सिंह गुड्डू ने अपना संपूर्ण जीवन हरियाणवी लोक संस्कृति को समर्पित कर दिया है। उन्होंने न केवल कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान दिया, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का भी प्रयास किया। वे आज के युवाओं के लिए एक सच्चे प्रेरणा स्रोत हैं।
