'दूजवर' के लेखक सचिन बांगड़ से खास बातचीत

हरियाणा के चर्चित ओटीटी प्लेटफॉर्म स्टेज पर चर्चित फ़िल्म दूजवररिलीज़ हुई थी उसी दौरान फ़िल्म के लेखक सचिन बांगड़ से हुई बातचीत के कुछ अंतरंग पल आपके समक्ष लेकर आया है सिनेमैटिक हरियाणा

संवेदनशील और गंभीर विषयों पर लिखना हमेशा से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, और सचिन बांगड़ ने इसे साबित किया है अपनी फिल्म ‘दूजवर’ के जरिए। हाल ही में उनसे हुई बातचीत में उन्होंने अपने लेखन सफर और इस फिल्म के बनने की कहानी साझा की।

शुरुआत उनकी फेसबुक पोस्टों से हुई थी। वहां वे छोटी-छोटी कहानियां लिखा करते थे। एक बार उन्होंने एक लड़का और लड़की की बातचीत पर आधारित कहानी लिखी, जिसमें दोनों कई सालों बाद जन्माष्टमी के दिन मिलते हैं। यह कहानी हरियाणवी एक्टर केशव कादयान को बेहद पसंद आई। उन्होंने सचिन से कहा कि वह इस पर फिल्म बनाना चाहते हैं, और उसी से ‘मीरा’ फिल्म बनी। 

इसके बाद धीरे-धीरे ‘दूजवर’ तक सफर पहुंचा। दरअसल, स्टेज OTT के लिए किसी प्रोजेक्ट पर चर्चा के दौरान ‘दूजवर’ का मूल विचार प्रवेश राजपूत ने प्रस्तुत किया। उस समय केशव ने सचिन का नाम सुझाया और विश्वास जताया कि यह विषय वही अच्छे से लिख सकते हैं। इसके बाद स्टेज और केशव की तरफ से उन्हें ऑफर मिला। सचिन बताते हैं कि प्रवेश राजपूत ने बीच-बीच में गाइड किया, बातें साझा कीं और इस तरह आइडिया विकसित होता गया। पटकथा की बारीकियां समझाने के बाद ही उन्होंने ‘दूजवर’ की स्क्रिप्ट तैयार की।

यह विषय अपने आप में बेहद अनोखा और गंभीर था। समाज में जब पति की मृत्यु हो जाती है तो पत्नी का विवाह देवर से करा देना एक पुरानी सामाजिक परंपरा रही है। लेकिन आज यह बहुत विवादित और संवेदनशील विषय बन चुका है। खासकर इसलिए कि देवर और भाभी का रिश्ता पारंपरिक रूप से मां-बेटे जैसा माना जाता है। ऐसे रिश्ते को पति-पत्नी के रूप में दिखाना और फिर भी मानवीय दृष्टिकोण से संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करना सचिन के लिए बड़ी चुनौती रहा। यही कठिनाई उन कलाकारों के लिए भी रही जिन्होंने इन किरदारों को निभाया।

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कलाकारों के चयन की प्रक्रिया भी रोचक रही। सचिन पहले से केशव कादयान को जानते थे। आशीष नेहरा से उनकी पहली मुलाकात ‘DJ वाले बाबू’ के सेट पर हुई थी। शुरुआत में ‘मनोज’ का किरदार केशव के लिए ही लिखा गया था, लेकिन बाद में उन्होंने ही सुझाव दिया कि यह भूमिका आशीष नेहरा को दी जाए। सचिन मानते हैं कि वास्तव में आशीष से बेहतर कोई इस किरदार को निभा भी नहीं सकता था। उन्होंने अपने अभिनय से इसमें जान डाल दी और हर सीन में पूरी ईमानदारी से खुद को झोंक दिया।

इसी तरह ‘आरती’ का किरदार भी बेहद जटिल था। इस भूमिका को निभाने के लिए न‍िशा शर्मा से बेहतर कोई और अभिनेत्री हरियाणा में नहीं हो सकती थी। सचिन कहते हैं कि वह अपने किरदार को जिस तरह पकड़ती हैं, वह काबिल-ए-तारीफ़ है। उनमें जबरदस्त पोटेंशियल है और ‘दूजवर’ की धुरी ही वे थीं। आरती के द्वंद, पीड़ा और साहस को पर्दे पर जीवंत करना केवल न‍िशा के ही बस की बात थी।

इस बातचीत के अंत में सचिन बांगड़ ने अपने अनुभव साझा करने के लिए आभार जताया और आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए शुभकामनाएं भी प्राप्त कीं।

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