वो हरियाणवी फिल्म जिसका सबसे ज़्यादा विरोध हुआ — ‘जी कुत्ता सै’ की पूरी कहानी
भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा में पिछले कुछ वर्षों में कई प्रयोग हुए हैं, लेकिन हरियाणवी फ़िल्म ‘G Kutaa Se (जी कुत्ता सै)’ उन चुनिंदा फिल्मों में से है जिसने न सिर्फ़ एक बोल्ड विषय उठाया, बल्कि समाज की अनकही सच्चाइयों को बिना लाग-लपेट के सामने रखा।
राहुल दहिया द्वारा लिखित और निर्देशित यह फ़िल्म प्रेम, वर्जनाओं और ऑनर किलिंग की निर्मम हक़ीक़त को बेहद वास्तविक ढंग से पेश करती है।
फ़िल्म का संक्षिप्त विवरण
Title: G Kutaa Se (जी कुत्ता सै)
Language: हरियाणवी / हिंदी
Duration: 103 मिनट
Country: भारत
Production Houses: SFE International, Full Frame Entertainment Pvt.Ltd.
Produced by: विनोद शर्मा
Written & Directed by: राहुल दहिया
कहानी:
प्रेम बनाम समाज की “इज़्ज़त”
दिल्ली से सटे हरियाणा के एक गाँव में कहानी तीन ज़िंदगियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो प्रेम, वासना और सामाजिक ‘इज़्ज़त’ के बीच पिस जाती हैं। फ़िल्म ऑनर किलिंग, कठोर रूढ़ियों और यौन वर्जनाओं पर करारी चोट करती है। इसकी कच्ची सच्चाई और ग्रामीण जीवन की असल झलक दर्शकों को अंदर तक झकझोर देती है।
टाइटल का असली मतलब: “G Kutaa Se” क्यों
नाम को लेकर फ़िल्म रिलीज़ से पहले ही काफी सवाल उठे, पर निर्देशक राहुल दहिया स्पष्ट करते हैं—“असल कुत्ता वह गुस्सा है, वह कुंठा है जो हमारे अंदर बैठी होती है।” यानी शीर्षक कहानी की मर्मस्थली से सीधा जुड़ा हुआ है।
35 दिनों की वास्तविक शूटिंग यात्रा
सोनीपत के मूल निवासी राहुल दहिया हरियाणा की ज़मीन, भाषा और संस्कृति को गहराई से समझते हैं। यही उनकी फिल्मों में भी दिखाई देता है—कच्चापन, यथार्थ और लोकजीवन की सच्ची गंध।
फ़िल्म की शूटिंग पूरे हरियाणा के असली गाँवों में महज़ 35 दिनों में पूरी की गई। गांवों का सादा जीवन, खेत-खलिहान और तंग गलियां—सब कुछ कहानी को असलीपन प्रदान करता है।
मुख्य लोकेशन्स
• गुरुग्राम
• जींद के आसपास के गाँव
• राखीगढ़ी (ऐतिहासिक क्षेत्र)
• इक़्कस गाँव
इन जगहों ने फिल्म को एक रॉ और ऑर्गेनिक टच दिया जिसका असर पूरी कहानी में महसूस होता है।
रागनी “चिलम हाथ में”—हरियाणा की धड़कन
हरियाणवी लोकगायक विकास पहासुरिया द्वारा गाई गई रागनी “चिलम हाथ में” फिल्म में उपयोग की गई। पूरी रागनी रिकॉर्ड की गई थी, लेकिन फिल्म में सिर्फ़ एक अंतरा शामिल किया गया, जो दृश्य की भावनाओं को और तीव्र करता है।
शूटिंग के दौरान आई चुनौतियाँ
- स्थानीय लोगों की आपत्तियाँ
- प्रशासनिक बाधाएँ
- भीड़ नियंत्रित करना
- संवेदनशील दृश्यों को वास्तविक रूप से फ़िल्माना
इसके बावजूद टीम ने दृढ़ता के साथ फिल्म को पूरा किया।
रिलीज़ और विवाद
• फ़िल्म को हरियाणा के 23 सिनेमाघरों में रिलीज़ किया गया।
• रिलीज़ के साथ ही कुछ संवादों और एक शब्द को लेकर विरोध भी हुआ।
• निर्देशक राहुल दहिया को धमकियाँ तक मिलीं, लेकिन उन्होंने विवादित शब्द बदलकर स्थिति संभाली।
उनके शब्दों में—
“ये अपना ही हरियाणा है… लोग अपने हैं। कुछ बातें उन्हें खराब लगी होंगी।”
शूटिंग का यादगार अनुभव
जींद की हनुमान कॉलोनी में एक सीन के दौरान, जब पुलिसवाला लड़की को बाल पकड़कर खींचता है, तो आसपास की भारी भीड़ सच्चाई और रीलिटी के बीच का फर्क भूल गई। उस दिन का तनाव और रोमांच पूरी यूनिट के लिए अविस्मरणीय रहा।
AWARDS & ACCOLADES
• The Golden Calton Awards 2017 – Winner
• 63rd Filmfare Awards – Nominations
o Best Debutant Director
o Best Original Story
• 17th JIO MAMI Film Festival – India Gold
• Edinburgh Festival of Indian Films 2017 – Official Selection
• 16th New York Indian Film Festival – Official Selection
• Chicago South Asian Film Festival – Official Selection
• YES Foundation Social Impact Awards – Nomination
फ़िल्म की मुख्य टीम (Crew)
Co-Producer: शरीब रज़ा
Executive Producer: सुरभि शर्मा
Creative Producer: दानिश रज़ा
Cinematographer: सचिन कबीर
Add DOP: आलोक श्रीवास्तव
Music: एंजो जॉन, पीटर ब्रोडरिक, रुगर ज़ुइडरवेल्ट
Sound: अभिजीत रॉय, सतीश पूजारी
Editor: प्रणय निल्ले, संदीप सिंह बेजेली
Art Dept: अम्बिका आचार्य, खुशाल गुप्ता
Costume: ममता, संजय
हरियाणवी सिनेमा का भविष्य
राहुल दहिया निश्चय से कहते हैं—
“भविष्य बहुत अच्छा है। बस प्रोफ़ेशनल अप्रोच और दमदार कंटेंट की ज़रूरत है।”
और वाकई, ‘G Kutaa Se’ जैसे साहसिक प्रयोग हरियाणवी फिल्म इंडस्ट्री को एक नई पहचान और गंभीरता देते हैं।
