वेब सीरीज़- ‘जानलेवा इश्क़’ के निर्देशक हेमंत प्रदीप से बातचीत
पिछले दिनों स्टेज ओटीटी पर रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘जानलेवा इश्क़‘ के निर्देशक हेमंत प्रदीप से फ़िल्म को लेकर कई सवाल जवाब हुए उसी अंतरंग बातचीत के कुछ अंश हाजिर है आपके लिए
बॉलीवुड में वर्षों तक काम करने के बाद जब पहली बार हरियाणा में प्रोजेक्ट किया गया, तो अनुभव बेहद सुखद रहा। यहाँ की बढ़ती हुई हरियाणवी फ़िल्म इंडस्ट्री को देखकर संतोष और खुशी मिली। ‘जानलेवा इश्क़’ एक बड़ा क्राइम और रोमांटिक ड्रामा है। इसे बनाने के दौरान तकनीकी स्तर पर कई बारीकियों पर काम करना पड़ा।
तक़रीबन 33 साल के अनुभव का पूरा उपयोग इस प्रोजेक्ट में किया गया और उसी के परिणामस्वरूप एक मजबूत और प्रभावशाली रचना सामने आई। कुल 11 दिनों तक शूटिंग चली। शुरुआत में FX06 कैमरे से शूट करने का विचार था, लेकिन प्राथमिकता ARRI कैमरा को दी गई और अंततः उसी से फ़िल्मांकन किया गया।
तकनीकी दृष्टि से फिल्म को बेहतर बनाने के लिए लाइट्स और साउंड पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही स्क्रीन प्ले सचिन बंगाड़ ने बेहद सटीक ढंग से लिखा, जिसने पूरी फ़िल्म की गुणवत्ता को नई ऊँचाई दी। बजट की कमी को लेकर यह मानना था कि हाँ, कुछ जगहों पर यह समस्या ज़रूर रहती है, लेकिन हर बार इसका दोष बजट को नहीं दिया जा सकता। कई बार प्रोजेक्ट इसलिए कमजोर पड़ जाते हैं क्योंकि उनमें न अभिनय और न लेखन पर पर्याप्त मेहनत की जाती है।
‘जानलेवा इश्क़’ में सीमित बजट में काम हुआ, लेकिन क्वालिटी पर कहीं भी समझौता नहीं किया गया, और यही इसकी सफलता का मुख्य कारण भी रहा। स्क्रिप्ट के स्तर पर भी यह अनुभव उल्लेखनीय रहा। लेखक सचिन बंगाड़ पहले भी ‘दूजवर’ और कई अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स लिख चुके हैं। उनकी लिखी स्क्रिप्ट को पढ़कर यह समझ आया कि अगर इसे तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए, तो यह फ़िल्म बहुत अच्छी बन सकती है। और टीम ने मिलकर ठीक वही किया।
इस तरह ‘जानलेवा इश्क़’ न केवल अपने क्राइम और रोमांटिक पहलुओं में दमदार साबित हुई, बल्कि तकनीकी मजबूती और संतुलित लेखन की वजह से हरियाणा की फ़िल्म इंडस्ट्री के लिए भी एक नई दिशा तय करती नज़र आई।
