'रॉकी मेंटल' से 'अखाड़ा' तक का प्रेरणादायक सफर
संजू सैनी (संजय संजू सैनी) हरियाणा के उन चुनिंदा लेखकों में से हैं जिन्होंने अपनी दमदार कहानियों के बल पर क्षेत्रीय सिनेमा और ओटीटी की दुनिया में अलग पहचान बनाई। पंजाबी सुपरहिट फिल्म “रॉकी मेंटल” के लेखक और हरियाणा की लोकप्रिय वेब सीरीज़ “अखाड़ा” के क्रिएटर एवं लेखक के रूप में उन्होंने अपनी लेखनी का लोहा मनवाया।
प्रारंभिक जीवन
संजू सैनी का जन्म 10 अक्टूबर 1990 को हरियाणा के जींद जिले के बरोली गांव में एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम कंवर सिंह तथा माता का नाम इंदु देवी है। वे हमेशा अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माता को देते हैं और मानते हैं कि उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान उनकी मां का रहा है।
उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, जींद से प्राप्त की, जहां से उन्होंने 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की।
शिक्षा
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने चंडीगढ़ से बी.एससी. (बायोटेक्नोलॉजी) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बायोइन्फॉर्मेटिक्स में मास्टर डिग्री हासिल की, जिसमें जेनेटिक्स और बायोलॉजी का गहन अध्ययन शामिल था। बाद में उन्होंने चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद से मनोविज्ञान (Psychology) में भी स्नातकोत्तर अध्ययन किया।
साहित्य से फिल्मों तक
कॉलेज के दिनों में संजू सैनी का सपना एक उपन्यासकार (Novel Writer) बनने का था। उन्होंने लगभग 8–9 उपन्यास लिखे, जिन्हें भविष्य में प्रकाशित करने की योजना है।
दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने लेखन की शुरुआत फिल्मों के लिए नहीं, बल्कि केवल अपने शौक के लिए की थी। उन्होंने हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू के अनेक प्रसिद्ध लेखकों को पढ़ा। उस समय उन्हें फिल्म निर्माण की तकनीकी जानकारी भी नहीं थी और न ही उन्होंने हिंदी साहित्य का औपचारिक अध्ययन किया था। वे केवल कहानियां पढ़ते और लिखते रहे।
'रॉकी मेंटल' की कहानी कैसे बनी
एक बार पढ़ाई के दौरान जब वे अपने गांव बरोली आए हुए थे, तब जींद और गोहाना के बीच स्थित एक गांव की यात्रा के दौरान उन्हें “रॉकी मेंटल” की कहानी का विचार आया। उस समय हरियाणवी सिनेमा का दायरा बहुत सीमित था और उन्होंने केवल अपने मन की संतुष्टि के लिए यह कहानी लिखकर रख दी। उन्हें स्वयं भी विश्वास नहीं था कि यह कभी फिल्म बन पाएगी।
इसी दौरान उन्होंने “जाट रांझा” नामक एक और कहानी भी लिखी, जो एक उलझे हुए युवक के जीवन पर आधारित थी।
पहला अवसर
चंडीगढ़ में पढ़ाई के दौरान एक रात लगभग 3 बजे उनकी मुलाकात एक व्यक्ति से हुई, जिसे उन्होंने अपने कमरे पर ठहरने का निमंत्रण दिया। उस व्यक्ति ने संजू की लिखी हुई कहानियां पढ़ीं और कहा कि इन पर फिल्म बनाई जा सकती है।
इसके बाद उनके मित्र रुबेल, जो पंजाब में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर थे, ने उनकी मुलाकात पंजाबी निर्देशक राही से करवाई। आगे चलकर उनकी मुलाकात परमिश वर्मा, विजय सैनी और बिमल चोपड़ा से हुई और इसी क्रम में “रॉकी मेंटल” फिल्म अस्तित्व में आई।
यह फिल्म पंजाब ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही गई। परमिश वर्मा अभिनीत “रॉकी मेंटल” ने यूट्यूब और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर करोड़ों दर्शकों तक अपनी पहुंच बनाई।
'अखाड़ा' – हरियाणा की लोकप्रिय वेब सीरीज़
मुंबई से जींद लौटने के बाद संजू सैनी से Stage OTT की टीम ने संपर्क किया और उनसे हरियाणा पर आधारित एक नई कहानी लिखने का आग्रह किया।
यहीं से जन्म हुआ “अखाड़ा” का।
अखाड़ा हरियाणा के पहलवानों के संघर्ष, सपनों, पारिवारिक जीवन और सामाजिक चुनौतियों पर आधारित एक सशक्त वेब सीरीज़ है। इस सीरीज़ का निर्देशन आशु छाबड़ा ने किया, जबकि इसके क्रिएटर और लेखक संजू सैनी रहे।
सीरीज़ को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और यह Stage OTT की सबसे चर्चित तथा हरियाणा की सबसे लोकप्रिय वेब सीरीज़ में शामिल हो गई।
इसके बाद “अखाड़ा फिर से” के रूप में इसका दूसरा सीज़न भी रिलीज़ किया गया, जिसे भी दर्शकों ने सराहा।
लेखन की सोच
संजू सैनी का मानना है कि—
“लेखन का सबसे बड़ा गुरु स्वयं इंसान होता है।”
हालांकि वे रमेश मूर्ति को अपना गुरु मानते हैं, जिनसे उन्होंने थिएटर और सामाजिक जीवन की अनेक महत्वपूर्ण बातें सीखीं।
उनका मानना है कि हर अच्छी कहानी आम आदमी को अपने जीवन से जोड़ती है। उनके अनुसार किसी भी कहानी में केवल मुख्य पात्र ही नहीं, बल्कि उसका परिवेश और समाज भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
प्रमुख कृतियां
रॉकी मेंटल (Punjabi Feature Film) – लेखक
अखाड़ा (Stage OTT) – क्रिएटर एवं लेखक
अखाड़ा फिर से – क्रिएटर एवं लेखक
जाट रांझा (अप्रकाशित कहानी)
व्यक्तिगत विचार
संजू सैनी का मानना है कि जीवन भी एक अखाड़े की तरह है, जहां हार और जीत दोनों आती हैं, लेकिन संघर्ष कभी नहीं रुकना चाहिए।
उनका कहना है—
“जो सितारे चमक जाते हैं, उन्हें पूरी दुनिया देखती है; लेकिन जो धुंधले रह जाते हैं, उनका भी अपना अस्तित्व होता है। मेरी कहानियां उन्हीं लोगों की आवाज़ बनने की कोशिश करती हैं।”
आज संजू सैनी अपनी मौलिक कहानियों, यथार्थवादी लेखन और हरियाणा की मिट्टी से जुड़े विषयों के कारण भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा और ओटीटी जगत के प्रमुख लेखकों में अपनी पहचान बना चुके हैं।
