बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं राजकुमार धनखड़ लेखन, गायन, अभिनय, काव्यपाठ और मंच संचालन में समान दक्षता
हरियाणवी लोक संस्कृति के संरक्षण एवं सांवर्धन में विभिन्न विधाओं एवं लोककलाओं का अपना विशिष्ट मौलिक महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही अनेक रचनाकारों, कलाकारों तथा लोक संस्कृतिकर्मियों ने अपने-अपने ढंग से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के महायज्ञ में योगदान दिया है। वर्तमान दौर में भी हरियाणा प्रदेश की इस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए अनेक कलाकार प्रेरक भूमिका निभा रहे हैं, जिनमें राजकुमार धनखड़ अपनी बहुमुखी प्रतिभा के चलते किसी औपचारिक परिचय के मोहताज नहीं हैं। एक वरिष्ठ रंगकर्मी, प्रखर हास्य कवि तथा संजीदा सांस्कृतिकर्मी के रूप में पिछले करीब दो दशकों से वे अपने मौलिक सृजन, गायन, अभिनय, काव्य पाठ, संचालन आदि के माध्यम से हरियाणवी बोली, साहित्य एवं संस्कृति के निष्काम साधक एवं अध्येता के रूप में अनूठी सेवा कर रहे हैं।
1 जनवरी, 1978 को झज्जर जिले के कासनी गांव में पिता आजाद सिंह तथा माता शीलावती देवी के घर किसान परिवार में जन्मे बालक राजकुमार बचपन से ही कलाप्रेमी रहे हैं। गायन, काव्य पाठ, मिमिक्री आदि की बाल प्रतिभा समय के साथ निखरती गई, जिसके चलते नेहरू कॉलेज, झज्जर पहुंचते ही अपनी इन विभिन्न विधाओं के चलते वे यूथ फेस्टिवल्स में छाने लगे तथा मंच के मंजे हुए कलाकार बनकर उभरे। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। राजकुमार धनखड़ ने छठी कक्षा से ही लिखना शुरू कर दिया था। वे अपनी कविताएँ और कहानियाँ सुनाने लगे थे। उनकी लेखन प्रतिभा बचपन से ही दिखाई देने लगी थी। वर्ष 2001 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से संगीत (वोकल) में एमए करते हुए संगीत तथा रंगमंच की बारीकियाँ सीखी। एक ओर जहां उन्होंने यूथ फेस्टिवल में राष्ट्रीय स्तर तक नाम कमाया, वहीं हरियाणवी सिनेमा तथा रंगमंच में भी अपने अभिनय से अनूठी छाप छोड़ी। हरियाणवी फिल्म शहीद-ए-हरियाणा, तेरा मेरा वादा, सेल्यूट हंसा, करम आदि के अलावा अनेक वेब सीरीज में भी अपने अभिनय का लोहा मनवाया, जिनमें कैंप बनवास, मेरे यार की शादी (सीजन 1 & 2 ), देसी थाना, लंदन इन हरियाणा, दिल होग्या लापता, कॉलेज कांड, बवाल, विदेशी बहू, गुलाब चूरमा आदि उल्लेखनीय हैं। हरियाणवी फिल्म लाइसेंस तथा चिड़ीबाज में भी उनके अभिनय की विशेष चर्चा रही। तेरा मेरा वादा फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया फूलिया का किरदार बेहद चर्चित रहा। हरियाणवी फिल्म तेरा मेरा वादा के लिए राजकुमार धनखड़ ने दो हरियाणवी गीत भी लिखे। उन्होंने अपनी लेखन प्रतिभा के साथ-साथ एक अच्छे कॉमेडियन के रूप में भी पहचान बनाई।
एक हास्य कवि के तौर पर राजकुमार धनखड़ ने बड़े-बड़े काव्य मंचों पर हरियाणवी हास्य एवं संस्कृति का परचम लहराया है। वर्ष 2012 में कला ग्राम, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित सांग महोत्सव तथा रागिनी महोत्सव के संचालन व संयोजन में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। इस अवसर पर उन्हें प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु फौजी जाट मेहर सिंह अवार्ड से मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल की ओर से विशेष रूप से अलंकृत किया गया। हरियाणा इनोवेटिव फिल्म एसोसिएशन (हाइफा) द्वारा उन्हें ‘ऊक चूक’ फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर सम्मानित किया जा चुका है। रंगमंच के क्षेत्र में वरिष्ठ रंगकर्मी राजेश फोगाट तथा संगीत के क्षेत्र में अपने संगीत प्राध्यापक मुकेश वर्मा, भारती शर्मा, भारती चक्रवर्ती आदि से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला।
राजकुमार धनखड़ का दमदार अभिनय बना चर्चा का विषय हरियाणवी मनोरंजन जगत में अपनी शानदार अभिनय प्रतिभा से पहचान बना चुके अभिनेता राजकुमार धनखड़ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में रिलीज़ हुई हरियाणवी फिल्म Licence में उन्होंने एक पुलिस अधिकारी के किरदार को बेहद प्रभावशाली अंदाज़ में निभाया है। उनके दमदार संवाद, सशक्त अभिनय और स्वाभाविक प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया है। इससे पहले STAGE पर रिलीज़ हुई चर्चित सीरीज़ Chidibaaz में उनके द्वारा निभाया गया कालू नाई का किरदार दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। इस भूमिका ने उन्हें घर-घर पहचान दिलाई और हरियाणवी दर्शकों के बीच उनकी एक अलग छवि बनाई। लगातार अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर राजकुमार धनखड़ यह साबित कर रहे हैं कि वे हर भूमिका में खुद को ढालने की क्षमता रखते हैं। उनकी मेहनत, समर्पण और अभिनय कौशल उन्हें हरियाणवी फिल्म और ओटीटी जगत के उभरते हुए प्रतिभाशाली कलाकारों की कतार में खड़ा करता है। दर्शकों को अब उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स का भी बेसब्री से इंतज़ार है।
हरियाणवी चुटकुलों की चटक प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध श्री धनखड़ करीब 400 चुटकुले विभिन्न सार्वजनिक मंचों से सुना चुके हैं, जिनकी रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। हरियाणवी संस्कृति तथा गीत-संगीत में नवाचार के लिए साधनरत युवा लोकगायक मुकेश काळे आजकल इन चुटकुलों को एआई की मदद से सोशल मीडिया पर नए फ्लेवर में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिन्हें बेहद पसंद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर चालीस हजार से ज्यादा फॉलोअर्स के साथ श्री धनखड़ निरंतर हरियाणवी बोली, संगीत तथा संस्कृति के संरक्षण के लिए नई-नई परियोजनाओं के माध्यम से लीक से हटकर काम करने हेतु गंभीर हैं। एक स्टैंडअप कॉमेडियन के तौर पर वे गजब की प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं।
श्री धनखड़ बताते हैं कि साहित्य, संगीत, रंगमंच, कला और संस्कृति ऐसे क्षेत्र हैं, जिन्हें ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ कहा जा सकता है, यानी इनमें जितना काम किया जाए कम है। इनका कोई ओर-छोर नहीं है। हरियाणवी संस्कृति तो प्राचीन काल से ही बेहद समृद्ध रही है। उनकी इस बहुआयामी सृजनशीलता में उनकी अर्धांगिनी पूनम तथा तीनों बच्चे विद्योतमा, प्रद्योतमा व रविन्द्र का निरंतर रचनात्मक सहयोग मिला है, जिसके चलते वे अपनी आजीविका डॉक्टरी के साथ इन तमाम रुचि-अभिरुचियों को आगे बढ़ा पा रहे हैं। हालांकि उन्होंने रंगमंच, सिनेमा, काव्य मंच तथा लेखन के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करते हुए अपनी विशिष्ट अलग पहचान बनाई है, फिर भी अभी उनका सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है।
