रमेश चहल - कविता से कैमरे तक—रमेश चहल, हरियाणवी सिनेमा का गौरव
जन्म: 4 अक्टूबर 1982
जन्मस्थान: हरिपुरा, जिला कैथल, हरियाणा
योग्यता: एम.ए. (जनसंचार एवं पत्रकारिता), चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय
हरियाणवी साहित्य, सिनेमा और पत्रकारिता की दुनिया में अपना एक अलग मुकाम बनाने वाले रमेश चहल उन विरले रचनाकारों में गिने जाते हैं, जिनकी कलम से कभी भी भद्दा या उद्देश्यहीन लेखन नहीं निकला। संवेदनशील लेखन, सामाजिक सरोकार और हरियाणवी मिट्टी की खुशबू—ये तीन स्तंभ उनके पूरे कार्यक्षेत्र का आधार रहे हैं
फ़िल्मी सफर : निर्देशक, अभिनेता और कहानीकार
रमेश चौहल ने हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कई चर्चित और सफल प्रोजेक्ट्स का निर्देशन किया, जिनमें—
बतातौर निर्देशक उनकी प्रमुख फिल्में:
द रॉयल ब्लड – दादा छोटूराम
सेफ हाउस
सेफ हाउस 2
अंगद
चिड़ीबाज़
विशेष डॉक्यूमेंट्री फ़िल्में:
रूले होये कलाकार
राजकुमार से राजू पंजाबी
दादा कुशाल सिंह दहिया
महाकुंभ
इन डॉक्यूमेंट्रीज़ ने हरियाणवी कला, कलाकारों और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाई।
बतौर अभिनेता उनकी प्रमुख फिल्में:
चौधर
चौधर 2
सेफ हाउस
सेफ हाउस 2
अंगद
चिड़ीबाज़
एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में भी रमेश चहल ने अपनी सहज अभिव्यक्ति और दमदार संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीता है।
संगीत जगत में योगदान
100 से अधिक हरियाणवी गीतों और रागिनियों के निर्देशन व लेखन के साथ रमेश चौहल हरियाणवी म्यूज़िक इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा हैं।
बतौर निर्देशक उनके चर्चित सांग:
पिंगला भरथरी
लीलो चमन
हीर-रांझा
अंजना पवन
ऐतिहासिक एवं सामाजिक शोज़
गूँगे पन्ने
खाप फ़ाइल्स इन कार्यक्रमों ने हरियाणा के सामाजिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहलुओं को गहराई से दर्शाया।
पत्रकारिता का अनुभव*
लगभग *11 वर्षों तक संपादक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने पत्रकारिता में सटीकता, संवेदना और सत्य की दृढ़ता को अपने पेशे का मुख्य आधार बनाया।
लेखन और साहित्यिक पहचान
फ़िल्म स्क्रिप्ट राइटर
निर्देशक
गीतकार
कहानीकार
स्तंभकार
हरियाणवी कवि
उनकी रचनाओं में हरियाणा की जमीन, समाज और संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती है।
सम्मान और उपलब्धियाँ
हरियाणा गौरव सम्मान
चहल गौरव सम्मान
ऑल टाइम बेस्ट वेबसीरीज – सेफ हाउस
बेस्ट डायरेक्शन – द रॉयल ब्लड दादा छोटूराम
IFFI, गोवा (इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया) में विशेष आमंत्रित सदस्य
विभिन्न विश्वविद्यालयों के युवा महोत्सवों में जज के रूप में सेवाएँ
संघर्ष
उनका सफर प्रेरणादायक होने के साथ अनूठा भी रहा, क्योंकि अपने शब्दों में—
“संघर्ष कोई नहीं, सब मजे-मजे में हो गया।”
यह वाक्य उनकी सकारात्मकता, सहजता और आत्मविश्वास का प्रमाण है।
व्यक्तित्व और दृष्टिकोण
रमेश चहल की सोच हमेशा समाज, संस्कृति और युवा पीढ़ी को प्रेरित करने की रही है। उनके काम में हरियाणवी अस्मिता, लोकजीवन और आधुनिकता के सुंदर संतुलन का प्रभाव मिलता है। सरल स्वभाव, स्पष्टवादिता और अपनी जड़ों से गहरा लगाव उन्हें अन्य कलाकारों से अलग पहचान देता है।
रमेश चहल हरियाणवी कला जगत का वह नाम हैं, जिन्होंने पत्रकारिता, फिल्म निर्देशन, अभिनय, गीत लेखन और कहानी रचना—हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी रचनाएँ न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि संस्कृति और समाज के मूल्यों को भी संरक्षित रखहैं।
— हरियाणवी कला जगत का वह नाम हैं, जिन्होंने पत्रकारिता, फिल्म निर्देशन, अभिनय, गीत लेखन और कहानी रचना—हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उनकी रचनाएँ न केवल मनोरंजन करती हैं, बल्कि संस्कृति और समाज के मूल्यों को भी संरक्षित रखा हैं।
