भागीरथ शर्मा (पारीक) : संघर्ष, तकनीक और रचनात्मकता से गढ़ी एक प्रेरणादायक यात्रा
हरियाणा की धरती ने समय-समय पर अनेक ऐसे कलाकार और तकनीकी विशेषज्ञ दिए हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान दिलाई। इन्हीं नामों में एक प्रमुख नाम है भागीरथ शर्मा (पारीक) का, जिन्होंने फिल्म एडिटिंग, कलर ग्रेडिंग, सिनेमैटोग्राफी और पोस्ट-प्रोडक्शन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। वे उन चुनिंदा तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं, जिन्होंने कैमरे के पीछे रहकर अपनी कला से फिल्मों और संगीत वीडियो को नया जीवन दिया। भागीरथ शर्मा (पारीक) का जन्म 06 जनवरी 1992 को हरियाणा के जिला सिरसा के गाँव रिसालिया खेड़ा में हुआ। साधारण परिवार में जन्मे भागीरथ का बचपन संघर्षों के बीच बीता, लेकिन उनके सपने हमेशा बड़े रहे। बचपन से ही उन्हें कैमरा, फिल्में, संगीत और तकनीक आकर्षित करते थे। जब उनके हमउम्र बच्चे केवल फिल्में देखते थे, तब भागीरथ यह जानने की कोशिश करते थे कि एक फिल्म बनती कैसे है, किसी दृश्य को प्रभावशाली बनाने के पीछे कौन-सी तकनीक काम करती है और एक साधारण वीडियो को यादगार बनाने में संपादन की क्या भूमिका होती है।
शुरुआती दिनों में उनकी रुचि साउंड रिकॉर्डिंग और ऑडियो एडिटिंग में भी थी। उन्हें लगता था कि संगीत और ध्वनि किसी भी दृश्य की आत्मा होते हैं। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने पोस्ट-प्रोडक्शन की दुनिया को समझा, उनका झुकाव फिल्म एडिटिंग की ओर बढ़ता गया। उन्होंने महसूस किया कि संपादन ही वह कला है जो बिखरे हुए दृश्यों को एक कहानी में बदल देती है। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान एडिटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन को समर्पित कर दिया।
हर सफलता के पीछे संघर्ष की एक लंबी कहानी होती है। भागीरथ शर्मा की यात्रा भी इससे अलग नहीं रही। वर्ष 2010 में उन्होंने मारुति ड्राइविंग स्कूल में मात्र ₹2,500 प्रतिमाह वेतन पर नौकरी की। आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं थी कि वे अपने सपनों पर खुलकर खर्च कर सकें, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। दिन में नौकरी और बाकी समय सीखने की लगन ने उनके भीतर के कलाकार को लगातार मजबूत किया।
इसी दौरान उन्हें प्रसिद्ध Amar Audio कंपनी में सहायक संपादक (Assistant Editor) के रूप में काम करने का अवसर मिला। यह उनके जीवन का पहला बड़ा तकनीकी अनुभव था। यहाँ उन्होंने पंजाबी संगीत जगत के लोकप्रिय कलाकार मिस पूजा, रोशन प्रिंस और कुलदीप रसिला जैसे नामी गायकों के गीतों के पोस्ट-प्रोडक्शन में सहायक के रूप में कार्य किया। इन परियोजनाओं ने उन्हें प्रोफेशनल कार्यशैली, समय की महत्ता और गुणवत्ता के मानकों को बेहद करीब से समझने का अवसर दिया। यही वह समय था जब उन्होंने महसूस किया कि मेहनत और सीखने की भूख ही किसी तकनीशियन को आगे ले जाती है।
कुछ समय बाद भागीरथ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने सोचा कि केवल दूसरे राज्यों में काम करने के बजाय हरियाणा में रहकर भी एक मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। इसी सोच के साथ वे सिरसा लौटे और Rose Film & Music के नाम से अपना एडिटिंग कार्य शुरू किया। यह निर्णय उनके करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
यहीं उनकी मुलाकात निर्माता विकास सिंगरोहा, प्रसिद्ध लोकगायक गजेंद्र फोगाट और बाद में हरियाणवी संगीत जगत के लोकप्रिय कलाकार केडी (KD) से हुई। इन मुलाकातों ने उनके करियर को नई दिशा दी। गजेंद्र फोगाट और केडी के साथ उन्होंने लगभग 20 महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया। इन प्रोजेक्ट्स ने न केवल उनकी तकनीकी क्षमता को पहचान दिलाई, बल्कि हरियाणवी म्यूज़िक इंडस्ट्री में उन्हें एक विश्वसनीय एडिटर के रूप में स्थापित कर दिया।
संघर्ष के दिनों का एक प्रसंग आज भी भागीरथ शर्मा बड़े सम्मान के साथ याद करते हैं। उन्हें दिल्ली स्थित फैशन ई-कॉमर्स कंपनी Jabong.com में Creative Media विभाग में कार्य करने का अवसर मिला। लेकिन उस समय उनके पास दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं थे। ऐसे कठिन समय में गजेंद्र फोगाट ने उनकी प्रतिभा पर भरोसा जताते हुए उन्हें ₹2,000 दिए और कहा—
भागीरथ, तुम अच्छा काम करना… आगे बढ़ना।”
यह केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि उनके सपनों पर जताया गया विश्वास था। भागीरथ आज भी इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक मानते हैं। तकनीकी ज्ञान को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से फिल्म निर्माण एवं पोस्ट-प्रोडक्शन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। यहाँ उन्होंने फिल्म एडिटिंग, डिजिटल इंटरमीडिएट (DI), कलर ग्रेडिंग, सिनेमैटोग्राफी और आधुनिक पोस्ट-प्रोडक्शन तकनीकों का गहन अध्ययन किया। इस प्रशिक्षण ने उनके कौशल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया और उनकी कार्यशैली को और अधिक पेशेवर बनाया। समय के साथ भागीरथ शर्मा ने केवल एडिटिंग तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पोस्ट-प्रोडक्शन के लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी दक्षता विकसित की। आज वे फिल्म एडिटर, कलरिस्ट, DI विशेषज्ञ और सिनेमैटोग्राफर के रूप में समान रूप से सम्मानित किए जाते हैं। वर्तमान में वे Frameflix Studios के संस्थापक हैं। यह स्टूडियो आधुनिक पोस्ट-प्रोडक्शन तकनीकों से सुसज्जित है, जहाँ फिल्मों, वेब सीरीज़, म्यूज़िक वीडियो, विज्ञापन फिल्मों और डिजिटल कंटेंट का उच्च गुणवत्ता के साथ संपादन, कलर ग्रेडिंग और फिनिशिंग कार्य किया जाता है। उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे हर प्रोजेक्ट को केवल तकनीकी दृष्टि से नहीं, बल्कि एक दर्शक की भावनाओं को ध्यान में रखकर तैयार करते हैं। फिल्मों में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 2025 में रिलीज़ हुई फिल्म “मिशन देवभूमि” में उन्होंने फिल्म एडिटर के रूप में कार्य किया। इसके अलावा “किसान बिज़नेसमैन”, “बिरानी सरदार”, “सफ़र मैं हमसफ़र”, “नूर” तथा “निहाल: ए स्टोरी ऑफ़ अ वॉरियर” जैसी फिल्मों के संपादन में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। वहीं “लखमीचंद हरियाणवी” में उन्होंने अतिरिक्त सिनेमैटोग्राफर (Additional Cinematographer) फिल्मों में तकनीकी योगदान
लख्मीचंद हरियाणवी (फीचर फिल्म) – कलरिस्ट
मुआवज़ा – डी.आई. (Digital Intermediate / DI)
के रूप में अपनी सेवाएँ दीं। यदि हरियाणवी संगीत उद्योग की बात की जाए तो भागीरथ शर्मा उन तकनीकी विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्होंने अनेक सुपरहिट गीतों के पीछे अपनी रचनात्मक भूमिका निभाई। उनके द्वारा संपादित प्रमुख गीतों में “चटक मटक”, “टैगड़ी”, “घुँघरू टूट जाएगा”, “Z Black”, “सच्चे दरबार की”, “पूरणविराम”, “चमक चुनड़ी”, “डोगली”, “सुथरी सी छोरी” और “जो जले से” विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसके अतिरिक्त “हाँजी हाँजी बोल”, “ओ मोरे बालमा”, “फकीर”, “सिपाही”, “भूखड़”, “देवर का ब्याह”, “ब्याह के लेज्यांगे”, “शर्त”, “गुलछड़े 2”, “पतली कमर”, “पहली होली”, “प्रपोज़ मारगी”, “सीधा-सादा छोरा”, “मस्तानी”, “जादू”, “जी नहीं लगदा” सहित अनेक लोकप्रिय गीतों के संपादन और पोस्ट-प्रोडक्शन में उनका योगदान रहा है। भागीरथ शर्मा का मानना है कि “एक अच्छा एडिटर केवल दृश्य नहीं जोड़ता, बल्कि भावनाओं को जोड़ता है।” यही सोच उनके प्रत्येक कार्य में दिखाई देती है। वे हर फ्रेम, हर कट और हर रंग को इस प्रकार प्रस्तुत करते हैं कि कहानी दर्शकों के मन तक सीधे पहुँच सके। आज भागीरथ शर्मा (पारीक) भारतीय क्षेत्रीय मनोरंजन उद्योग के उन चुनिंदा पोस्ट-प्रोडक्शन विशेषज्ञों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपनी मेहनत, अनुशासन और तकनीकी उत्कृष्टता के बल पर एक अलग मुकाम हासिल किया है। मारुति ड्राइविंग स्कूल की छोटी-सी नौकरी से लेकर आधुनिक पोस्ट-प्रोडक्शन स्टूडियो के संस्थापक बनने तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।
उनकी यात्रा आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कैमरे के पीछे रहकर भारतीय सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का सपना देखते हैं। भागीरथ शर्मा निरंतर नए प्रयोगों, आधुनिक तकनीकों और रचनात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहे हैं तथा हरियाणवी सिनेमा और भारतीय फिल्म उद्योग के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
“कैमरे के पीछे खड़ा एक सच्चा कलाकार कभी केवल दृश्य नहीं बनाता, वह समय के साथ यादें गढ़ता है। भागीरथ शर्मा (पारीक) उन्हीं कलाकारों में से एक हैं, जिनकी मेहनत हर फ्रेम में दिखाई देती है और जिनकी पहचान उनके काम से बनती है।”
