डॉ. हनीफ भट्टी

रंगमंच, अभिनय एवं लोक संस्कृति के सृजनशील हस्ताक्षर

नाम: डॉ. हनीफ भट्टी
जन्म: 1 अप्रैल 1981
जन्मस्थान: गाँव जाजवान, जिला जींद, हरियाणा
पिता: श्री अमृत लाल
माता: श्रीमती रफीकन

डॉ. हनीफ भट्टी हरियाणा के उन बहुआयामी कलाकारों में हैं जिन्होंने रंगमंच, अभिनय, टेलीविज़न, फिल्म, ओटीटी, निर्देशन, शोध और प्रशिक्षण जैसे विविध क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने अपनी कला यात्रा रंगमंच से आरम्भ की और आज वे एक अभिनेता, निर्देशक, शोधकर्ता, प्रशिक्षक तथा सांस्कृतिक कार्यकर्ता के रूप में निरंतर सक्रिय हैं। वर्तमान में वे जिला प्रारंभिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), जींद में ड्रामा इंस्ट्रक्टर के रूप में कार्यरत हैं।

शिक्षा एवं शोध

डॉ. भट्टी ने पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के थिएटर एवं टेलीविज़न विभाग से “Punjab and Haryana Folk Theatre: A Comparative Study” विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2005 में इसी विश्वविद्यालय से थिएटर एवं टेलीविज़न विषय में एम.ए. किया।

इसके अतिरिक्त उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, नई दिल्ली से थिएटर एप्रिसिएशन कोर्स, एन.आर.आई.सी., पटियाला से कश्मीरी भाषा में डिप्लोमा, पंजाबी विश्वविद्यालय से पंजाबी भाषा में डिप्लोमा, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, मद्रास से अनुवाद में डिप्लोमा तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बी.एड. की उपाधि प्राप्त की।

फिल्म, टेलीविज़न एवं ओटीटी में योगदान

मनोरंजन जगत में उनका सफर मेकअप विशेषज्ञ के रूप में प्रारम्भ हुआ। उन्होंने टीचर फिल्म एंड टीवी इंस्टीट्यूट, पटेल नगर (नई दिल्ली) में मेकअप विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया। इसके बाद अभिनय, मॉडलिंग और प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया।

उन्होंने हरियाणा सरकार की डिजिटल इंडिया आधारित आधार कार्ड फिल्म, मेडिसिन विज्ञापन फिल्म तथा कमर्शियल विज्ञापन “Medicine Voitex” में अभिनय किया। इसके अलावा भोजपुरी, राजस्थानी और हरियाणवी गीतों में अभिनेता के रूप में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

उन्होंने टी-सीरीज़ के गीत “मेरी जान बांगरों” में मॉडल के रूप में कार्य किया तथा “फुलझड़ी” सहित अनेक हिंदी, भोजपुरी और राजस्थानी म्यूज़िक एल्बमों में अभिनय एवं मॉडलिंग की।

ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उन्होंने “अखाड़ा” (सीज़न 1 एवं 2), “शक” तथा “संगी” जैसी परियोजनाओं में अभिनय किया। वर्ष 2009 से 2014 तक वे परख एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड में प्रोडक्शन मैनेजर भी रहे।

रंगमंच यात्रा

डॉ. हनीफ भट्टी का रंगमंच से गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रंगमंचीय परियोजनाओं, नाटकों और कार्यशालाओं में अभिनेता, निर्देशक, प्रशिक्षक और आयोजक के रूप में कार्य किया। उन्होंने बलजिंदर नसरैल की कहानी “रौंकी” पर आधारित नाटक में अभिनय किया, जिसका निर्देशन सुशील कुमार सिंह ने किया। संस्कृति मंत्रालय एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सहयोग से आयोजित भारत–पाक अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जींद में आयोजित गीता जयंती समारोह में सहायक निर्देशक के रूप में भी योगदान दिया। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय, बुटाना, राजकीय महाविद्यालय जींद, अंकुर (मूक-बधिर) विद्यालय, हरियाणा कला परिषद, नेहरू युवा केंद्र तथा जिला बाल भवन सहित अनेक संस्थानों में रंगमंच एवं कठपुतली कार्यशालाओं का संचालन किया। सामाजिक जागरूकता, कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, खेल एवं सांस्कृतिक अभियानों से जुड़े नुक्कड़ नाटकों का निर्देशन एवं प्रशिक्षण भी दिया।

निर्देशन एवं अभिनय

डॉ. भट्टी ने अनेक चर्चित नाटकों का निर्देशन किया है, जिनमें “ताशेर देश”, “हयवदन”, “गुड बाय स्वामी”, “अंधेर नगरी चौपट राजा”, “द प्रपोज़ल”, “अंधों का हाथी” तथा “पोंगा पंडित” प्रमुख हैं। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों “गरीब की हाय”, “गुल्ली-डंडा”, “ईदगाह”, “बड़े भाई साहब” तथा “दो बैलों की कथा” का सफल मंचन भी किया। नुक्कड़ नाटकों में “नार्को टेस्ट”, “ये सपनों के मारे लोग”, “विसर्जन”, “पानी रे पानी”, “शोर-शोर” और “मोबाइल-मोबाइल” जैसे नाटकों का निर्देशन एवं अभिनय उल्लेखनीय रहा।

शोध एवं प्रकाशन

लोक रंगमंच, सामाजिक सरोकारों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं पर उनके अनेक शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। उनके प्रमुख शोध विषयों में लोक रंगमंच में लोककल्याण, कन्या भ्रूण हत्या के उन्मूलन में रंगमंच की भूमिका, सुशासन में रंगमंच का योगदान तथा भविष्य में लोक रंगमंच शामिल हैं।

उनके शोध-पत्र वितस्ता, काशफ, अनुशीलन, नटरंग, परिपक्ष्य, हरिगंधा, रंग अभियान तथा रंग संग जैसी प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

अन्य उल्लेखनीय योगदान

उन्होंने भारत सरकार के एन.ज़ेड.सी.सी. द्वारा आयोजित महाभारत उत्सव “समरमंथन” में, जिसका निर्देशन प्रसिद्ध रंगकर्मी बंसी कौल ने किया, मंच सहायक एवं अभिनेता के रूप में कार्य किया। डॉ. कमलेश उप्पल के निर्देशन में “दुलारी बाई” तथा सत्यव्रत राउत की सेट एवं लाइट डिज़ाइनिंग कार्यशाला में भी सक्रिय सहभागिता निभाई। उन्होंने मुंशी प्रेमचंद की कहानियों “कफ़न” और “घासवाली” का सफल मंचन भी किया।

सम्मान एवं उपलब्धियाँ

  • वर्ष 2001 – राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जींद द्वारा रोल ऑफ ऑनर
  • वर्ष 2003 – राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जींद द्वारा रोल ऑफ ऑनर
  • वर्ष 2015 – जिला प्रशासन, जींद द्वारा गणतंत्र दिवस सम्मान
  • वर्ष 2016 – गीता जयंती समारोह की उत्कृष्ट सफलता के लिए जिला प्रशासन, जींद द्वारा सम्मान
  • फरवरी 2018 – अभिनय रंगमंच, हिसार द्वारा राजीव मंचंदा रंग सम्मान .    
  • “डॉ. हनीफ भट्टी को रंगमंच एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु दैनिक जागरण थिएटर आइकन अवॉर्ड 2026, अभिनय रंगमंच हिसार का राजीव मंचंदा रंग सम्मान, जिला प्रशासन भिवानी द्वारा गणतंत्र दिवस सम्मान 2023 तथा जिला प्रशासन जींद द्वारा वर्ष 2015, 2016, 2017 एवं 2018 के गणतंत्र दिवस सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।”

कला-दृष्टि

डॉ. हनीफ भट्टी का मानना है कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का सशक्त साधन है। रंगमंच से लेकर फिल्म, टेलीविज़न और ओटीटी तक उनकी सक्रिय उपस्थिति भारतीय लोक संस्कृति, लोक रंगमंच और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है।

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