साहित्य, मंच और सिनेमा की बहुआयामी प्रतिभा
प्रारंभिक जीवन एवं साहित्यिक यात्रा
हरियाणा के हिसार से संबंध रखने वाली डॉ. अल्पना सुहासिनी आज साहित्य, पत्रकारिता, मंच संचालन और अभिनय की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वर्तमान में गाज़ियाबाद में निवासरत डॉ. अल्पना ने हिन्दी विषय में बी.ए. (ऑनर्स), एम.ए. तथा पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनके पिता सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री निर्दोष हिसारी हैं, जिनसे उन्हें साहित्यिक संस्कार विरासत में मिले।
वे मूलतः ग़ज़लकार हैं, लेकिन गीत, कविता, लेख और समसामयिक विषयों पर भी समान अधिकार के साथ लेखन करती हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तक ‘तेरे मेरे लब की बात’ साहित्य जगत में सराही गई है। उनकी रचनाएँ यूके से प्रकाशित पुरवाई, ऑस्ट्रेलिया से प्रकाशित ऑस्ट्रेलियांचल सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर में उप-संपादक के रूप में भी कार्य किया तथा आकाशवाणी दिल्ली एवं हिसार की आकस्मिक उद्घोषिका और दूरदर्शन हिसार की प्रस्तोता भी रहीं।
मंच संचालन एवं काव्य-पाठ की प्रभावशाली पहचान
डॉ. अल्पना सुहासिनी पिछले एक दशक से अधिक समय से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित आयोजनों का सफल मंच संचालन कर रही हैं। उन्होंने ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के सम्मान समारोह का संचालन किया, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रहे। दूरदर्शन हिसार के उद्घाटन समारोह में तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री सुषमा स्वराज की उपस्थिति में मंच संचालन करना उनके करियर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
वे लगातार हरियाणा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, बॉलीवुड इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, काशी इंडियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन, मुशायरे, युवा महोत्सव, नेशनल थिएटर फेस्टिवल ‘रंग उत्सव’, शिल्प ग्राम मेला तथा अनेक सांस्कृतिक, साहित्यिक और राजनीतिक आयोजनों का सफल संचालन करती रही हैं। उन्होंने पूनम ढिल्लों, मनोज बाजपेयी, राजपाल यादव, राजा बुंदेला, अखिलेन्द्र मिश्र, राजेन्द्र गुप्ता, राजेश जैस और गीता अग्रवाल जैसे दिग्गज कलाकारों की उपस्थिति में मंच संचालन कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।
कवयित्री के रूप में उन्होंने जश्न-ए-अदब, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, दूरदर्शन दिल्ली, डी.डी. उर्दू सहित अनेक मंचों और चैनलों पर काव्य-पाठ किया है। आकाशवाणी दिल्ली, हिसार और रोहतक से उनका काव्य-पाठ नियमित रूप से प्रसारित होता रहा है।
रंगमंच से फिल्मों तक का सफर
लगभग आठ वर्षों से रंगमंच से जुड़ी डॉ. अल्पना सुहासिनी ने हरियाणा की विभिन्न रंगमंच संस्थाओं के साथ अनेक नाटकों में प्रभावशाली अभिनय किया। थिएटर से प्राप्त अनुभव ने उन्हें फिल्मों और वेब सीरीज़ की दुनिया में एक मजबूत पहचान दिलाई।
उन्होंने S.P. Chauhan में यशपाल शर्मा और जिम्मी शेरगिल के साथ, छलांग में राजकुमार राव और नुसरत भरुचा के साथ तथा राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हरियाणवी फिल्म दादा लखमी में दादा लखमी की पत्नी की मुख्य भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त वे लव रंजन प्रोडक्शन की बॉलीवुड फिल्म ‘तू झूठी मैं मक्कार’ में रणबीर कपूर, श्रद्धा कपूर, डिंपल कपाड़िया और बोनी कपूर के साथ फीचर कास्ट का हिस्सा रहीं।
वेब सीरीज़ में कॉलेज कांड, ओपरी पराई, अग्निवीर, अखाड़ा (सीजन-2) और रूम नं. 103 जैसी परियोजनाओं में उन्होंने विविध और प्रभावशाली भूमिकाएँ निभाईं। वहीं हथियार, मिनख माटी और सुपवा प्रोजेक्ट जैसी शॉर्ट फिल्मों में भी उनके अभिनय को सराहना मिली।
साहित्यिक गुरु – श्रद्धेय डॉ. कुँवर बेचैन जी, साहित्य एवं सृजन के प्रेरणास्रोत – श्रद्धेय दीपक नगाइच ‘रोशन’ जी, अभिनय गुरु – श्रद्धेय श्री यशपाल शर्मा जी तथा रंगमंच गुरु – श्रद्धेय श्री राजेश कपूर जी।
सम्मान एवं उपलब्धियाँ
डॉ. अल्पना सुहासिनी को उनके उत्कृष्ट मंच संचालन, साहित्यिक योगदान और सांस्कृतिक सेवाओं के लिए अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा गया है। हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर द्वारा उन्हें बेस्ट एंकर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके अलावा गीत गरिमा सम्मान, नागरी प्रचारिणी सम्मान तथा बीकानेर साहित्य सम्मान सहित कई महत्वपूर्ण सम्मान उन्हें प्राप्त हो चुके हैं।उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति, सहज संवाद शैली और मंच पर आत्मविश्वास ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित मंच संचालकों में विशिष्ट स्थान दिलाया है।
वर्तमान गतिविधियाँ एवं आगामी परियोजनाएँ
वर्तमान में डॉ. अल्पना सुहासिनी अभिनय, साहित्य, मंच संचालन और सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय हैं। उनकी फीचर फिल्म ‘सांगी’ रिलीज़ हो चुकी है, जबकि चिड़िया, फॉलो कर लो, जो लेख लिखे राम नै, अजूबा और फौजन जैसी परियोजनाएँ दर्शकों के बीच आने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही वे विभिन्न साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं फिल्म समारोहों में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। अपनी संवेदनशील लेखनी, प्रभावशाली वाणी, सशक्त मंच संचालन और सहज अभिनय के बल पर डॉ. अल्पना सुहासिनी आज भारतीय कला, संस्कृति और सिनेमा जगत की एक सम्मानित एवं प्रेरणादायी हस्ती के रूप में निरंतर नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर हैं।
