चिराग भसीन

हरियाणवी सिनेमा के युवा और प्रतिभाशाली निर्देशक

चिराग भसीन का जन्म 15 सितंबर 2002 को हरियाणा के हिसार में हुआ। इनके पिता प्रदीप भसीन और माता अमिता भसीन हैं। बचपन से ही चिराग की रुचि खेल और रचनात्मक गतिविधियों में रही। शुरुआती दिनों में उनका सपना क्रिकेटर बनने का था और उन्होंने उसी दिशा में काफी समय तक प्रयास भी किया। लेकिन समय के साथ उनकी रुचि अभिनय, थिएटर और फिल्म निर्माण की ओर बढ़ती गई। यही जुनून उन्हें कैमरे के पीछे लेकर आया और उन्होंने निर्देशन को अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। चिराग भसीन ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (मास कम्युनिकेशन) की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने अपनी कलात्मक समझ को और बेहतर बनाने के लिए मास्टर ऑफ आर्ट्स (थिएटर) की पढ़ाई शुरू की, जिसकी शिक्षा वे वर्तमान में प्राप्त कर रहे हैं। मास कम्युनिकेशन और थिएटर की पढ़ाई ने उनके निर्देशन कौशल को नई दृष्टि और गहराई प्रदान की। बहुत कम उम्र में ही चिराग भसीन ने हरियाणवी मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना ली। सिर्फ 22 वर्ष की आयु में उन्होंने कई चर्चित हरियाणवी वेब सीरीज़ का निर्देशन कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। वे हरियाणा के उन चुनिंदा युवा निर्देशकों में शामिल हैं जिन्होंने इतनी कम उम्र में लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स का सफल निर्देशन किया।

निर्देशक के रूप में उनके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में घूंघट (Ghunghat), स्कैम (Scam), ज़िद्दी हरियाणवी (Ziddi Haryanvi), छापा (Chhapa), सत्य (Satya), कच्छाधारी (Kacchadhari), जालिमपुर (Zalimpur), कॉलेज डेज़ (College Days), कर्मा (Karma), सीन (Seen) और बाली (Baali) जैसी वेब सीरीज़ शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से उन्होंने सामाजिक विषयों, युवाओं की सोच और हरियाणवी संस्कृति को आधुनिक अंदाज़ में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। चिराग भसीन अपनी नई सोच, तेज़ कार्यशैली और सिनेमाई दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि हर प्रोजेक्ट में मनोरंजन के साथ-साथ मजबूत कहानी और प्रभावशाली प्रस्तुति देखने को मिले। यही कारण है कि कम समय में उन्होंने हरियाणवी डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। आने वाले वर्षों में चिराग भसीन से हरियाणवी सिनेमा और ओटीटी जगत को कई बड़े और यादगार प्रोजेक्ट्स की उम्मीद है। उनकी मेहनत, रचनात्मकता और समर्पण उन्हें हरियाणवी फिल्म उद्योग के उभरते हुए सबसे प्रतिभाशाली निर्देशकों में स्थान दिलाते हैं।
चिराग भसीन अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माता अमिता भसीन को देते हैं। उनका मानना है कि एक निर्देशक के रूप में आज वे जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनकी माँ का योगदान सबसे अधिक है। अमिता भसीन केवल एक माँ की भूमिका तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने हर कदम पर चिराग का मनोबल बढ़ाया और उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिराग के लगभग हर फिल्म और वेब सीरीज़ प्रोजेक्ट के सेट पर अमिता भसीन स्वयं मौजूद रहती हैं। शूटिंग से जुड़ी व्यवस्थाओं, कलाकारों और यूनिट के समन्वय से लेकर पूरे प्रोडक्शन की छोटी-बड़ी ज़िम्मेदारियों पर उनकी विशेष नज़र रहती है। उनके सहयोग और समर्पण के कारण चिराग पूरी एकाग्रता के साथ निर्देशन पर ध्यान दे पाते हैं।

चिराग भसीन अक्सर कहते हैं कि “मेरी माँ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं। उनकी मौजूदगी मुझे हर चुनौती का सामना करने का आत्मविश्वास देती है।” यही कारण है कि वे अपनी हर उपलब्धि और सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माँ को समर्पित करते हैं।
“सपनों को उम्र नहीं, मेहनत पहचान दिलाती है। चिराग भसीन इसी सोच के साथ हरियाणवी सिनेमा के भविष्य को नई दिशा देने वाले युवा फिल्मकार के रूप में लगातार आगे बढ़ रहे हैं।”

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