जहां मिट्टी की खुशबू कहानियों में ढलती है, वहीं से जन्म लेता है एक सच्चा फिल्मकार — आशीष नेहरा।
आशीष नेहरा हरियाणा की उस नई पीढ़ी के फिल्मकार हैं, जो जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक सिनेमा की भाषा में कहानियां कहना जानते हैं। उनका जन्म 27 अप्रैल 1990 को हरियाणा के रोहतक ज़िले के कलानौर में हुआ, जबकि उनका पैतृक संबंध निंदाना (महम) गांव से है। बचपन से ही उन्होंने अपने आसपास के जीवन, संघर्ष, रिश्तों और समाज को करीब से देखा—यही अनुभव आगे चलकर उनकी कहानियों की ताकत बने।
शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने होटल मैनेजमेंट, एयरलाइन और ट्रैवल-टूरिज्म में डिप्लोमा प्राप्त किया, लेकिन उनका असली झुकाव रचनात्मक दुनिया की ओर था। इस जुनून को दिशा देते हुए उन्होंने Dada Lakhmi Chand State University से फिल्म निर्देशन में स्नातक (2011, प्रथम बैच) की पढ़ाई की। इसके बाद Indira Gandhi National Open University से मास कम्युनिकेशन एवं जर्नलिज्म में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा हासिल कर अपने कौशल को और निखारा।
लेखन के क्षेत्र में आशीष नेहरा ने अपनी गहरी समझ और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। उन्होंने मेरे यार की शादी (Part-1) और दहलीज़ जैसे प्रोजेक्ट्स में संवाद लिखे, जबकि पिंजरे की तितलियाँ में कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद तीनों स्तरों पर अपना योगदान दिया। घर की बात में उन्होंने अतिरिक्त संवाद (uncredited) लिखकर भी अपनी रचनात्मक भागीदारी निभाई। उनकी लेखनी की खासियत है—सादगी में गहराई और ज़मीन से जुड़ी सच्चाई।
अभिनय के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। ग्रुप डी, दहलीज, माया जाल, दुज्वर, काँवड़, कांड 2010, डीजे वाले बाबू और हरियाणा केसरी जैसी परियोजनाओं के साथ-साथ उन्होंने DSP Dev 2 में भी काम किया। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी मौजूदगी Sapne vs Everyone, Virodh और Thukra Ke Mera Pyaar जैसी श्रृंखलाओं तक पहुंची, जहां उनके अभिनय ने दर्शकों के साथ एक सच्चा जुड़ाव बनाया।
निर्देशन के क्षेत्र में आशीष नेहरा ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी फीचर फिल्म पिंजरे की तितलियाँ और वेब सीरीज़ घर की बात उनके निर्देशन कौशल का प्रमाण हैं। इसके अलावा बाल्कनी, बंटू की टोली और मम्मी जी नमस्ते जैसी शॉर्ट फिल्मों के माध्यम से उन्होंने विविध विषयों पर काम करते हुए अपनी कहानी कहने की क्षमता को और मजबूत किया। उनके निर्देशन की खासियत है—भावनाओं को सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करना।
म्यूजिक वीडियो इंडस्ट्री में भी उन्होंने अभिनय और निर्देशन दोनों रूपों में योगदान दिया। लखमीचंद की टेक में उन्होंने Sapna Choudhary के साथ अभिनय किया, जबकि मीठा मीठा बोलकर में उनकी परफॉर्मेंस देखने को मिली। वहीं काला बलमा और प्यार वाली फीलिंग डिलीट मारनी जैसे लोकप्रिय गानों का निर्देशन कर उन्होंने अपने विज़ुअल ट्रीटमेंट की समझ को साबित किया।
आशीष नेहरा ने Cinematic Haryana Production द्वारा निर्मित सूरजकुंड क्राफ्ट फेयर पर आधारित डॉक्यूमेंट्री में वॉयसओवर देकर अपनी आवाज़ के माध्यम से भी प्रभाव छोड़ा। इस डॉक्यूमेंट्री का चयन Haryana International Film Festival 2026 में हुआ, जो उनके करियर की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है।
आज आशीष नेहरा एक ऐसे फिल्मकार के रूप में उभर रहे हैं, जो सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी कहानियों के जरिए समाज, संस्कृति और इंसानी भावनाओं को गहराई से छूते हैं। उनका काम हरियाणवी सिनेमा को नई दिशा देने की क्षमता रखता है—और उनका सफर यह संकेत देता है कि आने वाले समय में वे इंडस्ट्री में एक मजबूत और प्रभावशाली नाम बनेंगे।
